UP पुलिस के शौर्य से अपराधियों ने टेके घुटने.. UP में 2 साल में 15 हजार अपराधियों ने खुद से किया सरेंडर. पढ़िए और भी बहुत कुछ जो गवाह है जवानो के अथक परिश्रम का

राजनीति के गलियारो में वोटो के लालच को ले कर भले ही तमाम प्रकार के आरोप प्रत्यारोप चल रहे हों लेकिन जो हकीकत जमीन पर है उसकी गवाही आंकड़े दे रहे हैं .. उत्तर प्रदेश में सत्ता बदलने के साथ ही जिस प्रकार से पुलिस ने अपने तेवर बदले हैं उसका असर समाज की शांति और सुरक्षा के एहसास से साफ देखा जा सकता है . यही वजह है कि विगत चुनावों में जनता ने खुद विपक्ष के इस दावे को सही नहीं माना जिसमे वो आरोप लगा रहे थे कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था खराब है ..

विदित हो कि जारी हुए एक आंकड़े ने बिना वजह बिना ठोस प्रमाणों के पुलिस पर सवाल उठाने वालो को जहाँ जवाब दिया है तो वही दिन रात जाग कर समाज की रक्षा कर रहे पुलिस वालों की मेहनत की सार्थकता को भी दर्शाया है . इस आंकड़े के अनुसार 20 मार्च 2017 से 15 मई 2019 तक पन्द्रह हजार से अधिक (15,170) अपराधी न्यायालय में आत्मसमर्पण कर या स्वयं जमानत निरस्त कराकर जेल चले गये हैं .. इतना ही नहीं, इस बीच हुई पुलिस अपराधी मुठभेड़ में 8904 अपराधी गिरफ्तार हुए और 1154 घायल भी हुए ..

निश्चित रूप से इस जमीनी आंकड़े ने पुलिस की सक्रियता और उसकी उस मेहनत को दर्शाया है जो बहुत कम लोग जान पाते है . योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में 27 मई 2019 तक पुलिस व अपराधियों के बीच कुल 3896 मुठभेड़ हुई, इस दौरान पुलिस के 5 योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए जबकि 642 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं .. आंकड़ो में आगे इसी बीच चेकिंग में डेढ़ लाख से अधिक मुकदमे दर्ज हुए, NSA में 406 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई है।

आंकड़ो में आगे देखा जाए तो जून 2017, से मई 2019 तक प्रदेश पुलिस ने फूट पेट्रोलिंग से डेढ़ करोड़ से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग करते हुए चार लाख से अधिक व्यक्तियों को हिरासत में लिया इसमें डेढ़ लाख से अधिक मुकदमे दर्ज कराये गये और संलिप्त 232404 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश के लिए हमेशा से चुनौती रहे साम्प्रदायिक तनाव में भी भारी कमी आई है जिसका प्रथम श्रेय पुलिस को ही जाता है ..

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 मे विगत वर्षों की तुलना में साम्प्रदायिक, तनाव की घटनाओं में 66 प्रतिशत, जातिगत तनाव संघर्ष की घटनाओं में 60 प्रतिशत तथा की धर्म परिवर्तन की घटनाओं में लगभग 45 प्रतिशत की कमी आयी है। अगर समीक्षा अन्य अपराधो की हो तो आंकड़ों के मुताबिक 16 मार्च 2017 से 15 मई 2019 तक में बीते तीन वर्षों की तुलना में प्रदेश में डकैती में 25.29 प्रतिशत लूट में 15.24 प्रतिशत, हत्या में 8.42 प्रतिशत रोड-होल्डप में 100 प्रतिशत फिरौती के लिए अपहरण में 10.75 प्रतिशत, बलात्कार की घटनाओं में भी कमी आयी है।

अपराधों को शत-प्रतिशत दर्ज करने के लिए जनपदों को सख्त निर्दश दिय गये है तथा इस उद्देश्य से पहली बार पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में एफआईआर काउण्टर खोले गये हैं। 01 जनवरी 2019 से 30 अप्रैल 2019 तक प्रदेश पुलिस ने 1813 दो पहिया व 233 चार पहिया वाहन एवं 54 भारी वाहन बरामद करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस 01 जनवरी 19 से 15 मई 2019 तक 48 अभियुक्तों का गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 14 अपहृतों को सकुशल मुक्त कराने में सफल हुई।

उप्र पुलिस ने वर्ष 2018 में 19 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 24.62 लाख रुपये की भारतीय जाली मुद्रा प्राप्त करने में भी कामयाबी हासिल की। 16 मार्च 17 से 15 मई 19 तक की अवधि में पुलिस ने अवैध शस्त्र के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए फैक्टरी निर्मित 276 बन्दूक, 257 पिस्टल, 145 रिवाल्वर, 176 रायफल, 03 एके 47 और एके 56, 448 देशी निर्मित बन्दूक आदि बरामद की है। निश्चित तौर पर उपरोक्त आंकड़े पुलिस की सक्रिय कार्यशैली के गवाह हैं..

 

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय नोएडा

मोबाइल – 09598805228

 

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