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UP वालों की हीरो बनी मुजफ्फरनगर पुलिस.. जांच ऐसी हुई कि कोई बच नहीं सका और सातों हत्यारे घोषित हुए दोषी

बहुत पुरानी बात नहीं है , ये मामला अभी कुछ साल पहले का है . मुज़फ्फरनगर ही नहीं आस पास के जिले भी इसकी चपेट में आ गये थे और मामला यहाँ तक पंहुचा था कि विधायको तक को हिरासत में ले लिया गया और उनको जेलों में भर दिया गया . मीडिया में चर्चा केवल उनकी जो अपने घर को छोड़ आदि कर एहतियातन कैम्प आदि में पड़े थे .. लेकिन उन परिवारों की चीख और सिसकियाँ कोई नही सुन रहा था जिन्होंने अपने जवान बेटो को खो दिया था .

लेकिन उन परिवारों के साथ कोई अंत समय तक लगा रहा तो वो थी मुज़फ्फरनगर की पुलिस . जहाँ पहले उसने उन सभी दरिंदो को एक एक कर के चिन्हित किया जो इस पूरे दंगे की शुरुआत के लिए जिम्मेदार थे . उसके बाद तमाम तनाव और दबाव को दरकिनार करते हुए उनकी एक एक कर के गिरफ्तारी की . किसी को कहीं से पकड़ा और किसी को कहीं से .. फिर उनके खिलाफ सबूत इस प्रकार से तलाशे जैसे कोई भूसे के ढेर से सुई तलाशता है .

और उसके बाद लगातार गवाही आदि के लिए हाजिर हुए . आख़िरकार आज इंसाफ का दिन आया और सचिन व् गौरव की नृशंस हत्या कर के दंगे की आग को भडकाने वाले उन सभी दरिंदो को अदालत ने तमाम पक्के सबूतों के साथ दोषी करार दिया है . निश्चित तौर पर पीड़ित परिवारों की अथक मेहनत के साथ साथ मुज़फ्फरनगर पुलिस की शानदार कार्यशैली न्याय के इस दिन के लिए धन्यवाद की पात्र है . फैसला आने के दिन भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था मुज़फ्फरनगर में सुनिचित कर के दोषियों को दंड दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली मुज़फ्फरनगर पुलिस न सिर्फ प्रदेश में बल्कि पूरे देश में हीरो के तौर पर सामने आई है . इसके साथ ही आम जनमानस का पुलिस व्यवस्था में विश्वास भी बढ़ा है .

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