बहाना तो घोड़े का था लेकिन निशाने पर था हिन्दुत्व… जानिए गुजरात, घोड़ा और दलित का वो सच जिसे जहरीला बनाकर परोसा देश की तथाकथित मीडिया ने


गुजरात के भावनगर में 29 मार्च को एक युवक प्रदीप राठोर की ह्त्या हो जाती है जिसके बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया. प्रदीप दलित जाती का युवक बताया गया है. विपक्षी पार्टियों ने प्रदीप की मौत पर हंगामा खड़ा कर दिया कि प्रदीप की ह्त्या सवर्ण जाति के लोगों ने इसलिए की है क्योंकि प्रदीप ने घोड़े पर बैठकर सवारी की थी और सवर्ण जाती के लोगों को इससे अपनी बेइज्जती महसूस की तथा उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया. कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने सवर्णों को बदनाम करने के लिए तमाम तरह के आरोप लगाये कि सवर्ण दलितों से जलते हैं तथा उन्हें स्वीकार नहीं है कि एक दलित घोड़े पर बैठ सके.

अब गुजरात पुलिस ने प्रदीप राठोर की ह्त्या को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. पुलिस का कहना है कि 21 वर्षीय प्रदीप राठौड़ की हत्या घोड़े पर बैठने और उसे पालने के लिए नहीं बल्कि लड़कियों को छेड़ने के आरोप में हुई थी. जिला पुलिस अधीक्षक प्रवीण मल ने बताया कि शुरुआती जांच पड़ताल में यह बात सामने आई है कि प्रदीप को लोगों ने घोड़े पर बैठने के लिए नहीं बल्कि लड़कियों को छेड़ने की वजह से मौत के घाट उतारा था. उन्होंने कहा कि व्यर्थ में मामले को जातिगत तूल दिया जा रहा है जबकि उसकी ह्त्या घोड़े पर बैठने को लेकर नहीं हुई थी बल्कि लडकी छेड़ने को लेकर हुई थी.

पुलिस अधीक्षक प्रवीण मल ने जानकारी दी कि पुलिस ने इस मामले में पहले ही तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है और जांच कर रही है. उन्होंने कहा, ‘जैसे की एफआईआर में जानकारी दी गई थी कि लड़के की हत्या घोड़ा पालने के कारण की गई थी, जांच में ऐसा कुछ साबित नहीं हुआ है. उन्होंने कहा है कि हमने जांच में पाया कि बहुत से लोगों ने प्रदीप के ऊपर लड़कियों को छेड़ने का आरोप लगाया है और यही कारण है कि प्रदीप से कुछ लोगों का विवाद हुआ झगड़ा हुआ जिसमें प्रदीप की हत्या हो गयी. हालाँकि पुलिस का कहना है प्रदीप की हत्या करने वालों के खिलाफ कानून अपना काम करे रहा है लेकिन कोई इसे बेवजह जातिगत मुदा न बनाये क्योंकि ये जातिगत हत्या नहीं है.


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