आज जन्मदिन है UP पुलिस के एनकाऊंटर मैन कहे जाने वाले IPS अजय पाल शर्मा का. वो व्यक्तित्व जिन्होंने अपने दम पर बदल दी UP पुलिस की छवि


ज्यादा नहीं बस थोड़े दिन पहले की बात है , जब योगी आदित्यनाथ की सरकार नहीं थी. उस समय पश्चिम उत्तर प्रदेश का एक स्थान हुआ करता था शामली जनपद.. वो जगह अचानक ही दुनिया भर में चर्चित हो गई थी.. पता चला की वहां से हिन्दुओ ने पलायन करना शुरू कर दिया है . कश्मीर के बाद ऐसी घटना वो भी हिन्दू बहुल कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में होना एक संवेदनशील मामला था. इस मामले में राजनीति तो खूब हुई लेकिन समाधान के नाम पर कुछ नहीं किया गया..

एक बेहद विकट हालात में योगी आदित्यनाथ ने सत्ता सम्भाली पर प्रशासन में वही लोग थे जो हालात को सम्भालने में असफल रहे थे.. योगी आदित्यनाथ सरकार ने फिर तमाम लोगों में एक उस पुलिस अधिकारी में विश्वास जताया जिसके चेहरे से मासूमियत और बेहद सौम्यता झलकती थी. उनका नाम है अजय पाल शर्मा.. उनको जब शामली जनपद की कमान सौंपी गई तो वहां पहले से सक्रिय अपराधियों को लगा की ये मासूम सा लड़का आखिर हमारा क्या कर लेगा .

और उनकी वही सोच उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई . अजय पाल शर्मा की मासूमियत असल में केवल जनता के लिए थी, अपराधियों ने उनका वो चेहरा देखा जो उस से पहले कभी देखा तो दूर, उन्होंने सुना भी नहीं था और उसके बाद शामली जनपद में गोलियों की बौछार हुई.. पहले वो गोलियां व्यापारी या अपराधी के बीच एकतरफा चलती थी लेकिन अजय पाल शर्मा की तैनाती के बाद वही गोलियां पुलिस और अपराधी के बीच चलने लगी और व्यापारी व् आम जनता सुरक्षित हो गए..

ये ऐसी चुनौती थी जो स्वीकार करना इतना आसान नहीं था.. लेकिन अजय पाल शर्मा ने न सिर्फ इसको स्वीकार किया बल्कि उखाड़ फेंका उन तमाम अपराध की जड़ों को जो विष बेल की तरह आये दिन एक न एक नया अपराधी पैदा कर रही थीं.. आखिरकार कैराना से न सिर्फ पलायन रुका बल्कि अपराधी ही वहां से पलायन कर गये.. ये तो IPS अजय पाल शर्मा का एकमात्र पक्ष था जिसमे उन्होंने शामली जनपद को सही राह पर ला कर खड़ा कर दिया और आस पास के जनपदों से भी अपराधी भागने लगे..

इसके अलावा नॉएडा जनपद में पहले ऐसे अधिकारी अजय पाल शर्मा बने थे जो सरकारी या सार्वजनिक सम्पत्ति पर किसी प्रकार की मजहबी गतिविधियों को सख्ती से रोकने में सफल हुए थे.. पार्को इत्यादि को पूरी तरह से घेर कर उन पर मजहबी क्रियाकलाप शुरू कर दिए गये थे जिसको पहले ऐसे अधिकारी थे जिन्होंने सख्ती से रोका.. भले ही उसके लिए उन्हें तमाम विरोधो का सामना करना पड़ा हो पर वो न्याय पथ से इंच मात्र भी विचलित नहीं हुए थे..

कानून व्यवस्था के साथ साथ उनका एक मानवीय पहलू भी है.. 5 वर्ष से जेल में बंद सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की बेटी का फीस न जमा होने के चलते स्कूल से नाम कट जाने पर वो विचलित हो उठे थे और उन्होंने खुद से सब इंस्पेक्टर की बेटी की पूरे साल की फीस जमा करवा दी. यद्दपि इस बात को उन्होंने कभी आगे बढ़ कर शोर नहीं मचाया पर उनके सत्कर्म खुद ही दुनिया के आगे जाहिर हो गये और सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के परिवार ने उन्हें एक देवता का स्वरूप तक कहा.

वर्तमान समय में अजय पाल शर्मा जी रामपुर में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं .. इनकी कार्यशैली के चलते ही जनता में कानून व्यवस्था के प्रति इतना विश्वास जगा है कि एक लम्बे समय बाद पहली बार ऐसा चुनाव वहां की जनता ने देखा जिसमे उन्हें लगा की वहां किसी तानाशाह का नहीं बल्कि कानून का राज़ है.. चुनावो में वोटों की गिनती में आया अंतिम रिजल्ट भी संतुलित व् संघर्षपूर्ण चुनाव का प्रतीक है अन्यथा वहां हालत हमेशा एकतरफा हुआ करते थे..

आज उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को अपनी कार्यशैली से बदल कर रख देने वाले उन्ही अजय पाल शर्मा का जन्मदिन है.. अगर युवा पीढ़ी की बात की जाय तो पुलिस बल में अब तक मुंबई के दया नायक , प्रदीप शर्मा जैसे अफसर भी देश भर में जाने जाते थे लेकिन IPS अजय पल शर्मा के रूप में उत्तर प्रदेश पुलिस में भी एक ऐसा चेहरा है जो भारत भर में सकारात्मक रूप में चर्चा में हैं.. बच्ची के बलात्कारी को रामपुर पुलिस द्वारा दी गई सजा भी अभी सबको याद होगी और याद रहनी भी चाहिए..

सोशल मीडिया पर एक अतिचर्चित व्यक्तित्व के रूप में आज अजय पाल शर्मा को दी जा रही शुभकामनाएं इस बात का प्रतीक हैं की समाज ऐसे अधिकारियो में अपना विश्वास रखता है.. पुलिस बल से आम जनता को ऐसे सकारात्मक संदेश देने वाले व् अपराधियों में भय भेजने वाले अधिकारी को हर कोई आज दीर्घायु , यशस्वी व् सफल होने का आशीष दे रहा है . उन स्थानों के लोग तो इन्हें विशेष तौर पर याद कर रहे हैं जहाँ इनकी पहले पोस्टिंग रह चुकी है..

 


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