मस्जिद में केवल इसलिए नहीं घुसने दिया क्योंकि उसने वोट दिया था BJP को… राजनीति का मजहब से रिश्ता ?

जफर अली ने हिन्दू-मुस्लिम एकता तथा सांप्रदायिक के राजनैतिक नारों में विश्वास करते हुए बीजेपी को वोट किया तो उसके खिलाफ वही लोग खड़े हो गये जो ये नारे लगाते थे. हिन्दू_मुस्लिम एकता की बात करने वाले कथित मौलानाओं को जफर अली तथा उसके परिवार को मस्जिद में इसलिए नहीं घुसने दिया क्योंकि उन्होंने बीजेपी को वोट किया था. भाजपा को वोट देने के कारण जफर अली और उसके परिवार के सदस्यों को गांव का मस्जिद में प्रेवश करने और नमाज पढ़ने पर पाबंदी लगा दी गई है.

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मामला पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम का है जहाँ जफर अली ने आठ नं. मंगलदै लोकसभा क्षेत्र के दलगांव थाने में मामला दर्ज कराया है. जफर अली ने मीडिया को बताया कि वह और उसका परिवार मतदान के दिन 18 अप्रैल को नदीरकाश प्राथमिक विद्यालय स्थित मतदान केंद्र पर जाकर बीजेपी के पक्ष में वोट किया, जिसे कई लोगों ने देखा. इसके बाद वह अप्रैल शुक्रवार को दोपहर 12:30  बजे को नदीरकाश मस्जिद में नमाज पढ़ने गया. नमाज के समय मुशर्रफ अली ने हदीस का वाचन करने के बाद कहा कि बीजेपी मुसलमानों पर अत्याचार कर रही है और जो बीजेपी को वोट दे रहा है उसे मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ने दिया जाएगा.

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इसके पश्चात जफर अली खड़ा हुआ बोला हमने तो बीजेपी को ही वोट दिया है. ऐसा कहने पर हमें नमाज पढ़े बिना मस्जिद से निकल जाने को कहा और जब कुछ देर वह खड़ा रहा तो हमें गेट आउट कहते हुए दो-तीन लोग हमारे तरफ आने लगे, इसे देख हम मस्जिद से दलगांव थाने में जाकर इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई. जफर अली के पुत्र मुस्तफा कमाल ने कहा कि उसके पिता जफर अली को लेकर मस्जिद में मुशर्रफ अली बयान दे रहा था कि जो बीजेपी को वोट दिया है वह मुसलमान नहीं है, वह नवाज नहीं पढ़ सकता.

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