अवैध मजार तोड़ने गये अधिकारियो को हिन्दुओ ने ही भगाया.. पीर बाबा – पीर बाबा बोल कर लिपट कर रोने लगीं महिलाएं

तो इस प्रकार से कायम हुई धर्मनिरपेक्षता वहां पर.. आम जनता के साथ हिन्दू संगठन ही नही बल्कि खुद अधिकारी भी हो गये हैरान और वापस लौट आया वो दल जो गया था उसको तोड़ने के लिए. भोले भाले और सेकुलर हिन्दुओं को इन बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके श्रीराम के मन्दिर को किसने और क्यों बनने से रोक रखा है , कौन उनके धर्मस्थलों पर आये दिन विस्फोट करता है और कौन है जो उन्हें बुनियादी तौर पर अपना दुश्मन मानता है . वो तो पीर बाबा की भक्ति में लीन थे .

ये मामला है उत्तर प्रदेश के महोबा जिले का. यहाँ पर गाँव का नाम है सालट जहाँ पर मुसलमानों की आबादी मात्र 2 – 4 घर तक सीमित है और हिन्दू बहुतायत है . इन्होने ही कुछ साल पुरानी मजार को अभी हाल में अपने पैसे से सजाया संवारा और बाकायदा उसको गुम्बद आदि बना कर हरी चादर चढाई . यहाँ की महिलायें भी अक्सर अपने तमाम शुभ काम इसी मज़ार के दर्शन कर के शुरू करती हैं लेकिन ये मजार अवैध ही थी जिसकी शिकायत भारतीय जनता पार्टी विधायक ने प्रशासन से की थी .

भाजपा विधायक की शिकायत को जिला प्रशासन ने फ़ौरन संज्ञान लिया और कार्यवाही के लिए वन विभाग की टीम फ़ौरन भेज दी . वहां जाते ही इस टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा .. पुरुष आगे खड़े हो गये और महिलाएं मजार से पीर बाबा पीर बाबा कह कर लिपट गईं.. खुद वन विभाग के अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा और उन्होंने रिपोर्ट दी है कि इस मजार के खिलाफ किसी भी प्रकार का एक्शन लेने से मुस्लिम ही नहीं हिन्दुओं का विरोध झेलना होगा ..

इस मामले में जिला वन अधिकारी (डीएफओ) ने बताया कि निरीक्षण में पाया गया कि गांव के सभी वर्ग के लोगों ने चंदा जुटाकर दो या तीन साल पहले वन विभाग की जमीन पर मजार की दीवार और गुम्बद का निर्माण करवाया है, जिसके तोड़ने का विरोध हिन्दू ज्यादा कर रहे हैं। बकौल डीएफओ, मजार हटाने से गांव में कायम सामाजिक सौहार्द्र के बिगड़ने का खतरा है और मुस्लिम कम, हिन्दू ज्यादा विरोध करेंगे। ऐसी स्थिति में उसे हटाना मुमकिन नहीं है।

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