अपराधियों/आतंकियों की गोली झेलती पुलिस को सहना पड़ रहा नेताओं का थप्पड़ भी. हिमांचल कांग्रेस महिला विधायक का अक्षम्य अपराध

भारत की रक्षा के लिए अगर सेना के बाद सबसे ज्यादा किसी ने खून बहा कर बलिदान दिया है तो वो है पुलिस विभाग . जब सेना सीमा पार के शत्रुओं से आमने सामने का युद्ध कर के सरहदों की रक्षा करती है तब ठीक उसी समय पुलिस वाले देश के ही अन्दर हमारे और आप के बीच छिपे हुए देशद्रोहियों को खोज कर उनसे सीमा के अन्दर बसे समाज को बचाते हैं . भारी दबाव और गंभीर तनाव, धूल , धूप , बरसात , आंधी में भी जो यथासम्भव अपना सर्वस्व समाज को देते हैं उन पर अगर कोई एयरकंडीशन बंगले और एयरकंडीशन गाडी से चलने वाला नेता हाथ उठाता है तो यकीनन स्वतंत्र भारत के लिए इस से बड़ा अभिशाप कोई दूसरा नहीं हो सकता है .

सबसे ज्यादा बलिदान देने वाले पुलिस विभाग को उन नेताओं ने बदनाम किया जो एक भी उदाहरण आज़ादी के बाद का नही दे सकते अपने राष्ट्र प्रेम का .  विदित हो कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा शासन करने और राजनीती का सबसे ज्यादा अनुभव रखने वाली पार्टी कांग्रेस की एक महिला विधायक के कुकृत्यों के चलते एक बार फिर से राजनीति शर्मशार हुई है . अपने सबसे बड़े नेता राहुल गाँधी से जल्द से जल्द बिना उनकी इच्छा के मिलने की शौक कांग्रेस की डलहौजी इलाके से महिला विधायक आशा कुमारी कुछ इस कदर हावी हुई कि उन्होंने भीड़ की जबर्दस्त धक्का मुक्की को बेहद धैर्य और संयम से नियंत्रित कर रही एक महिला सिपाही को थप्पड़ मार दिया . वायरल हो रहे वीडियो में साफ़ साफ़ दिख रहा है कि महिला सिपाही उसी भीड़ और धक्का मुक्की को नियंत्रित कर रही है जो उन्ही कांग्रेस की विधायक द्वारा लाई गयी थी . ये वही कांग्रेस की महिला विधायक हैं जिन पर 67.3 बीघा जमीन धोखे से हथियाने के मामले में १ साल की सजा भी हो चुकी है जिसमे इन्हें हाईकोर्ट से राहत मिली थी .  

थोड़ी देर बेवजह का हंगामा करने के बाद अचानक ही कांग्रेस की विधायक  ने आपा खो दिया और महिला कांस्टेबल को थप्पड़ मार दिया . विधायक आशा कुमारी को राजघराने की सदस्या माना जाता है लेकिन वो रुतबा उनके इस कृत्य में कहीं नहीं दिखा और ये हरकत निहायत ही निम्स्तरीय थी जिसका उस महिला सिपाही ने उचित प्रतिरोध किया . ये वही राजनैतिक पार्टियां है जो अपने राजनेता के बगल से पक्षी भी गुजर जाने को पुलिस की लापरवाही बता कर उन्हें निलम्बित करने की मांग करने लगती हैं और जब पुलिस वाला सुरक्षा चाक चौबंद रखता है तो उसको थप्पड़ मारते हैं .

बात यहाँ नहीं खत्म हुई थी . इसी मामले में चोरी और सीनाजोरी दोनों देखने को मिली आगे जब अपने इस कुकृत्य के लिए निश्चित रूप से न्याय इसी में था कि कांग्रेस की विधायक को कानूनी कार्यवाही का सहर्ष स्वागत करना था लेकिन कांग्रेस की विधायक सीधे थाने में पहुच गयी उस महिला कांस्टेबल पर मुकदमा दर्ज करवाने जो अपने कर्तव्य पथ से ज़रा सा भी विमुख नहीं हुई . इस घटना का वीडियो जिस जिस ने भी देखा वो नेताओं की इस प्रकार की तानाशाही के विरोध में ही तर्क दिया . फिलहाल उन पुलिस कर्मियों के साहस और धैर्य को सैल्यूट है जो इस विषम हालत में भी समाज की रक्षा हर अपमान झेल कर भी करते हैं . वो तो सौभाग्य से इस घटना का वीडियो सामने आ गया अन्यथा अब तक झूठ बोलने में माहिर नेताओं ने सारा दोष महिला सिपाही पर लगा कर उसे ही पूरी तरह से दोषी बना दिया होता और कार्यवाही भी करवा दी होती . वैसे भी तमाम पुलिसकर्मी ऐसे ही मामले में जेल और निलंबन काट रहे हैं . 

यहाँ सवाल ये उठता है कि क्या पुलिस वालों का ना ही कोई आत्मसम्मान होता है और न ही कोई मानवाधिकार ? अफ़सोस मीडिया के उस वर्ग से भी है जो खुली असभ्यता दिखाने वाली कांग्रेस विधायक के ही आस पास घूम कर उनसे ही सफाई लेता रहा और पुलिसकर्मी के दर्द को दिखाना भी ठीक नहीं समझा … क्या ये घटना साबित नहीं करती कि इन्होने अपने शासन काल में किस प्रकार समाज की रक्षा के लिए वर्दी पहने पुलिस वालों के साथ मनमाने ढंग से शासकीय अत्याचार किया रहा होगा ?

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