पुलिस वालों को कौन संचालत कर रहा था मासूम प्रद्दुमन की मौत के मामले में, अब इसे वो खुद बताएंगे.. CBI ने खोला सनसनीखेज राज़

प्रद्युम्न मर्डर केस की तहकीकात का सिलसला ना खत्म होने को आ रहा है. लगता है पुलिस और सीबीआई दोनों मिलकर केस की गुँथी को सुलझाने में लगे हुए है। लेकिन एक ओर सीबीआई ने पुलिस पर आरोप लगया की पुलिस ने मर्डर केस में सबूतों के साथ छेड़ छाड़ की है। पुलिस ने सबूतों को तौर मोड़ कर पेश किया।

सीबीआई को प्रद्युम्न मर्डर केस की जांच सौंपी गयी है और सीबीआई ने अपने जांच में पहले हरियाणा पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा की गुरुग्राम पुलिस ने सबूतों को मिटाने की कोशिश की थी। इससे पहले पुलिस बस कण्डक्टर अशोक को मर्डर के आरोपी बनाने में घिरी हुई है।

सीबीआई सूत्रों से मिली जानकारी से इस मामले के शक के घेरे में आये कुछ पुलिसवालों के कॉल रिकार्ड की जांच की जा रही है. इस मामले में पुलिस के खिलाफ विभागीय कारवाई की जा सकती है।

यहां तक कहा गया है कि शक के घेरे में आये पुलिस को गिरफ्तार किया जा सकता है। इस विषय में वहीं, सीबीआइ के प्रवक्ता आरके गौड़ का कहना है कि जांच में किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए, इसे लेकर जिससे पूछताछ करने की आवश्यकता होगी, की जाएगी। सबसे पहले आरोपी की पहचान करने का काम किया जाता है। आरोपी की पहचान होने के बाद फिर मामले से संबंधित लोगों की पहचान की जाती है। जिसके ऊपर भी संदेह होगा, उससे पूछताछ की जाएगी।

गुरूग्राम पुलिस इसलिए शक के घेरे में है क्योकि उस वक्त मीडिया के सामने अशोक द्वारा गुनाह कबूल किए जाने को लेकर भी अब कहा जा रहा है कि उसने पुलिस के भारी दबाव में आकर ऐसा किया था।

सीबीआई ने बड़ा आरोप लगाते हुए अपने जांच से यह बात भी सामने आ रही है कि परिजनों के ऊपरी कोर्ट में गुहार लगाने के चलते गुरुग्राम पुलिस ने बस कंडक्टर अशोक कुमार को आरोपी बना दिया था। यही नहीं उसके पास से हथियार पाए जाने का भी दावा किया। लेकिन प्रद्युम्न परिवार वाले पहले से ही दावा कर था की कंडक्टर ने प्रद्युम्न को नहीं मारा। 

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