ये त्याग सिर्फ और सिर्फ माँ ही कर सकती है…….जरुर पढ़िए एक माँ के इस अनमोल त्याग को जिसके कारण बेटी बनी डॉक्टर


हमारी संस्कृति में माँ को भगवानका दर्जा दिया गया है. कहा जाता है कि इस धरती पर माता पिता भगवान का रूप होते हैं जो अपनी सन्तान के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार होते हैं. ये बिलकुल सत्य भी है क्योंकि जब इंसान हर जगह से निराश हो जाता है उस समय वो माता पिता ही होते हैं जो अपने बच्चों को न सिर्फ आगे बढाने का हौसला देते हैं बल्कि उनका साथ भी देते हैं.

इसके अलावा माँ को तो त्याग की साक्षात् प्रतिमूर्ति कहा गया है. माँ के बारे में कहा जाता है कि माँ खुद भूखी रह लेगी लेकिन अपनी सन्तान को भूखा नहीं रहने देगी. माँ की इसी ममता व त्याग को साबित कर दिखाया है हरियाणा के गुरुग्राम के सेक्टर 47 निवासी 43 वर्षीय मुंद्रा ने. जानकारी के मुताबिक एक स्कूल में अध्यापिका मुंद्रा की बेटी मेघा डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन 2013 में उसे कुछ परेशानी होने पर डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि किडनी खराब है. यह सुनते ही मेघा ने डॉक्टर बनने के सपने के साथ जीवन की उम्मीद भी छोड़ दी.उसकी जिंदगी डायलिसिस के सहारे चलने लगी.
माँ मुंद्रा से बेटी का ये दुःख देखा न गया व उन्होंने अपनी बेटी के सपने साकार करने के लिए उसको डॉक्टर बनाने के लिए अपनी किडनी देने का फैसला किया. बेटी मेघा ने बहुत मना किया लेकिन माँ नहीं मानी और उन्होंने बेटी को अपनी किडनी ट्रांसप्लांट करा दी. इसके बाद मेघा स्वस्थ हो गयी तथा MBBS करके डॉक्टर बन चुकी है तथा मैसूर के एक अस्पताल में सेवारत है. भगवान के आशीर्वाद से मेघा भी स्वस्थ हैं.
अपनी माँ के इस त्याग को याद करके मेघा कहती हैं कि मेरी माँ ने मेरे लिए जो किया है में अपनी जान देकर भी उनका कर्ज नहीं उतार पाउंगी. मेघा ने समाज के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि माँ बाप हमारे लिए अपनी सारी खुशियाँ त्याग देते हैं, खुद को ख़त्म कर लेते हैं लेकिन हमें आगे बढाते हैं. मेरा नौजवानों से यही कहना है कि जीवन में कितने भी आगे बढ़ जाओ लेकी हमेशा माता पिता के साथ रहना कभी भी माता पिता का साथ न छोड़ना.

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