कफील को हीरो 5 मिनट में बना दिया गया था, इस जांबाज़ रेलवे ड्राइवर का नाम हम बता रहे जो रक्षक है हजारों प्राणों के..

बीते दिनों हुए रेल हादसों में बहुत जाने गयी और बहुत से लोग घायल भी हुए थे। रेल हादसों की वजह से लोगो के अंदर डर बैठ गया था। धीरे धीरे इन हादसों से लोग ऊपर आ रहे है। रेल हादसों के वक्त कुछ लोगों ने धैर्य रखकर समझदारी से काम लिया और लोगो की जाने बचाई। ऐसे जाबाजों को जिनकी सूझ बुझ से यात्रियों के जाने बची उन्हें रेलवे ने आज सम्मानित किया।

बता दें कि हाली ही में हुए रेल हादसे में नागपुर मुम्बई दुरंतो एक्सप्रेस महाराष्ट्र में वासिंद और आसनगांव स्टेशनों के बीच 29 अगस्त को भूस्खलन के बाद इस ट्रेन के इंजन और नौ डिब्बे परी से उतर गए थे। तब नागपुर मुम्बई दुरंतो एक्सप्रेस के दो ड्राइवरों ने अपनी सूझ बुझ का परिचय देते हुए हजारों यात्रियों की जाने बचाई थी। उस हादसे में ये दोनों किसी मसीहा से कम नहीं थे उन यात्रियों के लिए जो जिन्दगी और मौत से लड़ रहे थे।
लोको पायलट विरेंद्र सिंह और सहायक लोको पायलट अभय कुमार पाल की सुझ बुझ की सरहना करते हुए रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने कहा, ‘उन्होंने कर्तव्यपरायणता एवं समर्पण की मिसाल पेश की और सच्चे रेलकर्मी की तरह अपने काम को अंजाम दिया।’ दोनों ड्राइवरों को रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों एवं इंजीनियरों की उपस्थिति में लोहानी ने सम्मानित किया। प्रशस्ति पत्र में लिखा गया है कि दोनों ने अनुकरणीय कर्तव्यपरायणता एवं सूझबूझ का परिचय दिया और ट्रेन पर ब्रेक लगाकर सैकड़ों यात्रियों की जान बचा ली। सिंह को 1000 रुपए और पाल को 5000 रुपए का पुरस्कार भी दिया गया।

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