बलिदानियों के परिवारों को गोद लेंगे आईएएस अधिकारी, इस तरह करेंगे मदद

श्रीनगर : जवानों की शहादत के बाद उनके परिजनों की मदद के लिए आईएएस अधिकारियों का एसोसिएशन आगे आया है। एसोसिएशन जवानों के परिवारों और विशेष रूप से इनके बच्‍चों की मदद के लिए आगे आया।

अधिकारियों ने स्वैच्छिक रूप से कदम उठाते हुए जवानों के परिवारों को अपनाने का फैसला किया है, ताकि इनके बच्चों की समुचित ढ़ग से पढ़ाई हो सके। इसके साथ ही शहीदों के परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर पेंशन, ग्रेज्‍युटी, सेवाओं का एलॉटमेंट मसलन पेट्रोल पंप, स्‍कूलों में बच्‍चों का दाखिला, युवाओं को सरकार के स्किल इंडिया या डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत विशेष कौशल हासिल करने के लिए प्रशिक्षण प्राप्‍त करने में मदद करना जैसे काम शामिल हैं।

इसके तहत कम से कम 5-10 वर्षों तक वह पूरे परिवार की देखभाल का जिम्‍मा उठाएगा। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस नई पहल के तहत शुरुआत में पिछले चार आईएएस बैच (2012-16) के 600-700 युवा अधिकारियों को अपनी पोस्टिंग वाले एरिया में से कम से कम एक शहीद परिवार की देखभाल का जिम्‍मा उठाने के लिए एसोसिएशन ने कहा है।

गौरतलब है कि इसके पहले भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर ने भी छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादी हमले में 25 बलिदानी जवानों के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने का फैसला किया है। शहीदों के परिवारों की सहायता के लिये आगे आये गंभीर ने ट्विटर पर कहा कि उनका फाउंडेशन शहीदों के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठायेगा।
 

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