मायावती के जीत के असर दिखा रहे मज़हबी रंग … अलीगढ़ में उर्दू में ली गई शपथ जबकि उत्तर भारत में हिंदीभाषी

हिंदी भारत की सवैंधानिक राजभाषा है जिसे 14 सितम्बर 1949 को अधिकारिक रूप से राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया.किसी भी राष्ट्र की पहचान उसके भाषा और उसके संस्कृति से होती है और पूरे विश्व में हर देश की एक अपनी भाषा और अपनी एक संस्कृति है जिसे छाव में उस देश के लोग पले बड़े होते है यदि कोई देश अपनी मूल भाषा को छोड़कर दुसरे देश की भाषा पर आश्रित होता है उसे सांस्कृतिक रूप से गुलाम माना जाता है

क्यूकी जिस भाषा को लोग अपने पैदा होने से लेकर अपने जीवन भर बोलते है लेकिन आधिकारिक रूप से दुसरे भाषा पर निर्भर रहना पड़े तो कही न कही उस देश के विकास में उस देश की अपनाई गयी भाषा ही सबसे बड़ी बाधक बनती है. अलीगढ़ नगर निगम के नव निर्वाचित महापौर फुरकान और पार्षद शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे थे.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह में स्थानीय बीजेपी विधायक भी पहुंचे थे.

सबसे पहले महापौर मोहम्मद फुरकान में हिंदी में शपथ ली. जिसके बाद कई और पार्षदों और सभासदों ने हिंदी में पद की शपथ ली. लेकिन जब मुशर्रफ हुसैन का नंबर आया तो माहौल गर्मा गया. बताया जा रहा है कि उन्हें हिंदी में लिखा शपथ पत्र ही दिया गया था लेकिन वो उसका उर्दू में अनुवाद कर पढ़ने लगे. जिसका वहां मौजूद बीजेपी विधायक ने कड़ा विरोध किया. नेताओं के गहमागहमी के बीच हंगामा बढ़ता देख वहां मौजूद पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और किसी तरह माहौल को शांत कराया. बीएसपी सभासद को पुलिस सुरक्षा में शपथ स्थल से हटाया गया. भारत के नागरिक होने के नाते हमें अपने देश भारत के राजभाषा हिंदी के बारे में जो हमारी मातृभाषा भी है और हमे इसे बोलने में फक्र महसूस करना चाहिए न की शर्मिंदगी.

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