लालू और उसके सहयोगी फँसे आपराधिक साजिश के जाल में, जानिए क्या है पूरा मामला……

बिहार में अपनी राजनीति का दबदबा बनाये रखने वाले आरजेडी प्रमुख लालू यादव पर अचानक आपराधिक साजिश का केस लगाये जाने का मामला सामने आया है। उन पर यह केस 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाला के लिए लगाया गया है। CBI की दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव समेत 45 अन्य नेताओं पर केस चलाने की इजाज़त दे दी है। 
जिनमें से बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र, जेडीयू सांसद जगदीश शर्मा का नाम भी शामिल हैं। साथ ही कोर्ट ने जल्द ही इस पर सुनवाई के आदेश दिये है। बता दें कि केस ख़ारिज करने की मांग लालू की तरफ से राम जेठ मलानी ने की थी। उन्होंने सीबीआई की दलील को खारिज कर दिया था। तो दूसरी तरफ कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को भी कानून के नियमों का पालन न करने पर फटकार लगाई और सीबीआई से केस में हुई देरी का कारण भी पूछा।
दरअसल, लालू को राहत देते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने नवंबर 2014 को लगे घोटाले की साजिश रचने और IPC 420 ठगी, 409 क्रिमिनल ब्रीच आफ ट्रस्ट और प्रिवेंशन आफ करप्शन के आरोप हटा दिए थे। इस पर अपना फैंसला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को एक अपराध के लिए दो बार सजा नहीं दी जा सकती। साथ ही झारखंड हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि लालू पर आईपीसी की अन्य दो धाराओं के तहत मुकदमा चलता रहेगा। वहीं, लालू का पक्ष रखते हुए जेठ मलानी ने कहा कि जब सभी मामलों में आरोप एक जैसे है, तो अलग- अलग केसों को चलाने की क्या आवश्यकता है। 
इस मामले पर सीबीआई की तरफ से SG रंजीत कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद के खिलाफ जो 6 अलग अलग मामले दर्ज हैं उन्हें एक जैसा नहीं देखा जा सकता। यदि बात करें पूरे मामले की तो यह उस समय हुआ जब लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। चाईबासा कोषागार से 37.7 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का आरोप है। चारा घोटाला 1990 से लेकर 1997 के बीच बिहार के पशुपालन विभाग में अलग-अलग जिलों में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है। 
सीबीआई ने हाईकोर्ट को चुनौती देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में केवल दो धाराओं के तहत सुनवाई को मंजूरी दी गई थी, जबकि अन्य आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि एक अपराध के लिए किसी व्यक्ति का दो बार ट्रायल नहीं हो सकता। झारखंड हाईकोर्ट के आदेशानुसार, भारतीय दंड संहिता की धारा-201(अपराध के साक्ष्य मिटाना और गलत सूचना देना ) और धारा-511 (ऐसा अपराध करने की कोशिश करना, जिसमें आजीवन कारावास या कारावास की सजा सकती है) के तहत लालू प्रसाद यादव के खिलाफ मामले की सुनवाई चलती रहेगी और उन पर लगे आरोपों को गम्भीरता से लिया जायेगा।
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