पीएम मोदी से प्रेरित होकर बिलाल मोहिउद्दीन ने हाथ से पत्थर छोड़ थामी किताबें

कश्मीर के युवा, जिन्होंने आज हाथों में पत्थर थाम लिए है, सेना पर पत्थर बरसाने वाले ये युवा ये भूल चुके हैं कि उनका भविष्य क्या है? लेकिन आज भी कुछ ऐसे युवा है जो कश्मीर की परिस्थितियों को मात देकर ये ठान चुके है कि उन्हें भविष्य में एक अच्छा अफसर बनना है। पीएम मोदी ने भी कहा था, कश्मीर के युवाओं को हाथ में पत्थर नहीं लैपटॉप और किताबें थामनी चाहिए। 
पीएम से प्रेरित होकर ऐसा ही कुछ कर दिखाया है कश्मीर के बिलाल मोहिउद्दीन भट ने। जिन्होंने UPSC में 10वीं रैंक हासिल कर देश में अपना नाम रोशन कर दिया है। बिलाल नॉर्थ कश्मीर के हंदवाड़ा गांव के रहने वाले है। बिलाल का कहना है कि शब्दों में मेरे लिए अपनी भावनाओं को जाहिर कर पाना बेहद मुश्किल है, मैं खुद को आज आसमान पर महसूस कर रहा हूं, मेरा केवल इसी बात पर विश्वास था- ट्राइ, ट्राइ, ट्राइ अगेन। मैं 2010 से ट्राइ कर रहा हूं। 
इसके आगे बिलाल ने कहा कि मेरा लक्ष्य IAS था और अब मुझे पूरा भरोसा है कि मुझे होम कैडर मिल जाएगा, मैंने अपना लक्ष्य पाने के लिए हर कुर्बानी दी है। मेरे पिता लंबे वक्त से इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि मैं अपने लोगों की सेवा कर पाऊं। अपनी सात महीने की बेटी मरियम का जिक्र करते हुए बिलाल ने कहा, जब से उसका जन्म हुआ, मैंने प्रिलिमनेरी क्लियर किया, इसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 
बिलाल इंडियन फॉरेस्ट अफसर हैं और फिलहाल लखनऊ में पोस्टेड हैं। वो चार बार UPSC का एग्जाम दे चुके हैं और इस साल नवंबर में वो 32 साल के हो जाएंगे, जो कि इस एग्जाम के लिए कटऑफ एज है। वहीं, बिलाल भट की सफलता पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि काफी उत्साह बढ़ाने वाला है कि आतंकवाद से प्रभावित इलाकों से युवा सिविल सर्विसेस का एग्जाम दे रहे हैं और टॉप कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व चीफ मिनिस्टर उमर अब्दुल्ला ने कहा, बिलाल भट ने पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है। मैं उम्मीद करता हूं कि कश्मीर के बेटे की हर ख्वाहिश पूरी हो।
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