भारत की एक जगह धीरे-2 बनती जा रही है म्यांमार.. वहां के बौद्धों ने मुसलमानों का किया सार्वजनिक बहिष्कार


म्यांमार में बौद्धों व रोहिंग्या मुस्लिमों के बीच संघर्ष को पूरी दुनिया जानती है कि वहां जब रोहिंग्या आक्रांताओं ने बौद्धों पर हावी होने की कोशिश की तथा अनगिनत बौद्धों के क़त्ल किये तो किस तरह से अहिंसा का उपासक बौद्ध समुदाय जाग्रत हो उठा व इसके बाद जो प्रतिकार किया वो पूरी दुनिया ने देखा. लेकिन अब हिंदुस्तान के बौद्ध भी म्यांमार के बौद्धों भी राह पर चल पड़े हैं तथा मुस्लिम उन्मादियों के खिलाफ जो कदम चलाया है वो देश के तथाकथित मानवतावादियों पर वज्र की तरह गिर सकता है.

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्र के बौद्धों ने मुस्लिमों के सम्पूर्ण बहिष्कार का एलान कर दिया है. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के दो नहीं बल्कि असल में तीन हिस्से हैं. जम्मू, कश्मीर और लद्दाख जिसमें से लद्दाख के इलाके में सबसे काम जनसंख्या है लेकिन पर यहां बौद्ध भी बहुतायत संख्या में हैं. लेकिन अब लद्दाख में भी अब मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ती जा रही है जिसे लेकर बौद्ध समुदाय आशंकित है तथा मुस्लिमों के बायकाट का एलान कर दिया है. बौद्धों का कहना है कि अब लद्दाख में भी कटटरपंथ बढ़ता ही जा रहा है जो निश्चित ही आगे जाकर लद्दाख क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बन सकता है, इसलिए उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ ये अभियान छेड़ा है.  बौद्धों में ऐलान किया है कि वह मुसलमानों से कुछ भी नहीं खरीदेंगे और उनके साथ व्यापार भी नहीं करेंगे. बौद्धों का कहना है कि वह अब सामाजिक बहिष्कार भी करेंगे.

बौद्धों का कहना है कि कश्मीर को पहले ही मुस्लिम कट्टरपंथियों का गढ़ बना दिया गया है तथा इसके बाद अब उनका अगला निशाना जम्मू व लद्दाख क्षेत्र है. उन्होंने कहा है कि जम्मू के हिंदुओं के अलावा अब लद्दाख के बोद्ध भी इस परेशानी को समझ रहे हैं. और इसी को लेकर उन्होंने मुसलमानों के बहिष्कार की बात कही है. जिसमें उन्होंने सख्ती से कहा है कि वह मुसलमानों से ना ही कुछ खरीदेंगे और ना ही व्यापार करेंगे. बौद्धों ने चेतावनी दी है कि वह आगे चलके सामाजिक बहिष्कार भी करेंगे. बौद्धों का कहना है की लद्दाख इलाके में अतिक्रमण किया जा रहा है, ताकि वहां पर मुसलमानों की जनसंख्या जल्द से जल्द बढ़ाई जा सके. लेकिन बौद्धों का कहना है कि वह ऐसा नहीं होने देंगे तथा अभी तो बायकाट किया है लेकिन वह लद्दाख को बचाने के लिए जो भी करना पड़ेगा करेंगे लेकिन लद्दाख को कश्मीर की तरह कटरपंथियों का गढ़ नहीं बनने देंगे.


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