राष्ट्र की मांग को स्वीकार किया बीजेपी ने… गिरा दी महबूबा मुफ्ती की सरकार

जम्मू कश्मीर में आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका उसी दिन से जताई जा रही थी जिस दिन जम्मू-कश्मीर में भाजपा तथा पीडीपी का गठबंधन हुआ था व मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने थी तथा उनकी मृत्यु के बाद महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनी थी. पहले दिन से ही कहा जा रहा था किये एक बेमेल गठबंधन है तथा इस सरकार का चलना मुश्किल है. इसका प्रमुख कारन बीजेपी तथा पीडीपी कि विचारधारा है जिसमें जमीन आसमान का अंतर् है. इसके बाद भी भाजपा ने इस उम्मीद के साथ पीडीपी को समर्थन दिया कि शायद इससे राज्य में शांति होगी तथा हालत सुधरेंगे, लेकिन हुआ इसके बिलकुल विपरीत और अब राष्ट्र कि मांग को स्वीकार करते हुए भाजपा महबूबा सरकार से अलग हो गई है.

आपको बता दें कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आज ही दिल्ली में राज्य के सभी बड़े पार्टी नेताओं के साथ बैठक की, जिसके बाद बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का फैसला किया है. बीजेपी ने समर्थन वापसी की चिट्ठी राज्यपाल को सौंप दी है. बीजेपी की ओर से राज्यपाल शासन की मांग की गई है. आपको बता दें कि बीजेपी नेताओं से मिलने से पहले अमित शाह ने NSA अजित डोभाल से भी मुलाकात की थी. फैसले के बाद बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि हमने गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर के तीन साल के कामकाज, सभी एजेंसियों से राय लेकर ये फैसला किया है. जिसके बाद ये तय हुआ है कि बीजेपी अपना समर्थन वापस ले रही है. राम माधव ने कहा कि तीन साल पहले जो जनादेश आया था, तब ऐसी परिस्थितियां थी जिसके कारण ये गठबंधन हुआ था. लेकिन जो परिस्थितियां बनती जा रही थीं उससे गठबंधन में आगे चलना मुश्किल हो गया था.

बीजेपी नेता राममाधव ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर सरकार बनी थी, उन सभी बातों पर चर्चा हुई. पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में स्थिति काफी बिगड़ी है, जिसके कारण हमें ये फैसला लेना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रधानमंत्री, अमित शाह, राज्य नेतृत्व सभी से बात की है. उन्होंने कहा कि सरकार के दो मुख्य लक्ष्य थे, जिसमें शांति और विकास सबसे अहम हिस्सा था. तीनों हिस्सों में विकास करना था, इसके लिए हमने गंठबंधन किया था. राम माधव ने बताया कि आज जो परिस्थिति बनी है, जिसमें एक भारी मात्रा में कश्मीर घाटी में आतंकवाद बढ़ा है. रेडिकलाइजेशन तेजी से आगे बढ़ रहा है. राम माधव ने कहा कि जो हालात बन रहे थे, उससे घाटी में फंडामेंटल राइट्स खतरे में आ रहे थे. पत्रकार शुजात बुखारी की श्रीनगर शहर में हत्या होती है. जो परिस्थिति बन रही थी उससे प्रेस फ्रीडम, फ्रीडम ऑफ स्पीच खतरे में आ गई.

उन्होंने कहा कि जहां तक केंद्र सरकार का रोल है, केंद्र ने तीन साल तक राज्य को पूरी मदद की. कई सारे प्रोजेक्ट भी लागू किए गए. उन्होंने कहा कि हमने शांति स्थापित करने के लिए ही रमजान महीने में सीजफायर लागू किया था, लेकिन उसमें भी शांति स्थापित नहीं हो पाई. हालात बिगड़ते जा रहे थे. बीजेपी नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने पूरा सहयोग किया है. गृहमंत्री ने लगातार घाटी का दौरा किया, सभी से बातचीत का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान को सीमा पार से गतिविधियों करने पर रोक लगाई, 4 हजार बंकर बनाए गए थे. उन्होंने कहा कि भले ही हम सरकार में थे, लेकिन मुख्य नेतृत्व बीजेपी के हाथ में था. इसलिए हम इन हालातों को संभालने में सफल नहीं रह पाए, कई मुद्दों पर राज्य सरकार असफल रही. घाटी में शांति स्थापित नहीं हो सकी इसके अलावा जम्मू और लद्दाख में भी विकास कार्य रुका रहा. जम्मू और लद्दाख की जनता के साथ भेदभाव हुआ. जिसके बाद अब  सरकार में रहना संभव नहीं रह गया था.

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