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जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद आया राज्य के डीजीपी का बड़ा बयान.. वो बयान जिसे सुनकर कांप उठेंगे आतंकी

कल भारतीय जनता पार्टी राष्ट्र की आवाज को स्वीकार करते हुए जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद महबूबा सरकार गिर गई. महबूबा सरकार गिरने के बाद राष्ट्रपति ने राज्य में राज्यपाल शासन को मंजूरी दे दी तथा आज बुधवार को राज्यपाल एनएन वोहरा ने राज्य की कमाल संभाल ली. राज्यपाल शासन लगते ही कश्मीर में प्रशासनिक हलचल भी शुरू हो गई है. खबर के मुताबिक़, छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) बीवीआर सुब्रमण्यम को कश्मीर की जिममेदारी सौंपी गई है, वहीं इसके अलावा दूसरी ओर सुरक्षा बलों ने भी आतंक के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज की है.
राज्यपाल शासन लागू के बाद जम्मू कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य ने जो बयां दिया है उसे सुनकर आतंकियों के होश फाख्ता हो जायेंगे.  डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि राज्यपाल शासन लागू होने के बाद पुलिस पर कोई प्रेशर नहीं होगा तथा आने वाले दिनों में आतंकियों के खिलाफ होने वाले ऑपरेशन में तेजी आएगी. उन्होंने कहा कि गवर्नर रूल में पुलिस के लिए काम करना आसान होगा. डीजीपी ने कहा, ‘हमारे ऑपरेशन जारी रहेंगे तथा अब ताबड़तोड़ कार्यवाही होगी. डीजीपी ने कहा कि रमजान के दौरान ऑपरेशंस पर रोक लगाई गई थी लेकिन ऑपरेशन पहले भी चल रहे थे लेकिन अब जब राजयपाल शासन लग गया तब इन्हें और तेज किया जाएगा.’ इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्यपाल शासन से उनके काम पर कोई फर्क पड़ेगा तो वैद ने कहा, ‘मुझे लगता है कि राजयपाल शासन लगने से उनके लिए काम करना और आसान हो जाएगा.’ डीजीपी वैद ने कहा कि रमजान सीजफायर की वजह से आतंकियों को फायदा पहुंचा है. उन्होंने बताया कि रमजान सीजफायर के दौरान कैंप पर होने वाले हमलों का जवाब देने की इजाजत थी, लेकिन हमारे पास कोई जानकारी है, तो उस आधार पर ऑपरेशन लॉन्च नहीं किया जा सकता था. ऐसे में सीजफायर से कई मायनों में आतंकियों को काफी मदद मिली.
डीजीपी ने कहा कि वह राजनीती पर कुछ नहीं कहना चाहते हैं लेकिन इतना जरूर है कि राज्यपाल शासन आने के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस के लिए आसान होगा तथा आतंकियों को कुचल दिया जायेगा. बताया गया है कि इसी को देखते हुए छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) बीवीआर सुब्रमण्यम को बुधवार को जम्मू-कश्मीर भेजा गया है. जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद ऐसा किया गया है. मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने मंगलवार शाम को सुब्रमण्यम के तबादले को मंजूरी दे दी. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘कुछ राजनेताओं की तरफ से पत्थरबाजों, अलगाववादियों और कट्टरपंथियों को समर्थन मिलता है। कोई राजनीतिक दबाव न होने से सुरक्षा बल ज्यादा अक्रामकता से काम करेंगे।’ माना जा रहा है कि अति संवेदनशील वाली जगहों पर ‘समर्थ’ ब्यूरोक्रेट्स और सुप्रींटेंडेंट्स ऑफ पुलिस की तैनाती की जाएगी, ताकि वे बगैर दबाव में आए आतंक विरोधी गतिविधियों का नेतृत्व कर सकें। अधिकारी ने बताया, ‘फिलहाल कई ऐसे काबिल ऑफिसर हैं, जो साइड लाइन कर दिए गए हैं। आतंकी बुराहन वानी की मौत के बाद घाटी में स्थिति और खराब हो गई थी। ऐसे में अब उन ऑफिसरों को आगे लाकर आतंकियों को काउंटर करने की रणनीति पर काम हो सकता है।’
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