Breaking News:

संसद में देशभक्ति सिखाने वाले फारुख अब्दुल्ला के नेता ने आतंकियों को बताया शहीद… खामोश हैं धर्मनिरपेक्षता के तमाम ठेकेदार

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन में देशभक्ति सिखा रहे थे. फारुख अब्दुल्ला चीख चीख कर कह रहे थे कि देश में मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है, उन पर शक किया जाता है लेकिन वह ये भूल गये थे कि देश अगर मुसलमानों को निशाना बनाता तो मिशाइल मैन के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. अब्दुल कलाम जी को अपना आदर्श नहीं बनाता. लोकसभा भवन से देशभक्ति सिखाने वाले फारुख अब्दुल्ला को आईना दिखाया है खुद उनकी ही पार्टी के एक नेता ने, जिसने कश्मीर में मारे गये गये आतंकियों को शहीद बताया है.

फारुख अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के नेता बशीर अहमद वीरी नाम ने आतंकियों को शहीद कहा है. न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में आतंकियों की हत्या से जुड़े सवाल पर बशीर अहमद वीरी ने कहा कि ये सभी कश्मीर की खातिर जान गंवा रहे हैं. कश्मीर की खातिर जो कोई भी जान गंवाएगा वह शहीद ही कहलाएगा. बशीर अहमद वीरी ने कहा, ‘कश्मीर मसले के लिए जितने लोगों का भी खून बहता है, वे सब शहीद हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर क्या वजह है कि घाटी के युवा अपने गरम-गरम खून का नजराना पेश कर रहे हैं. कुछ तो इसके पीछ वजह होगी.’

नेशनल कांफ्रेंस के दक्षिण कश्मीर जोन के अध्यक्ष बशीर ने कहा, ‘यहां इतने लोग मर रहे हैं, तो क्या अपने घर के लिए लड़ रहे हैं. कोई तो मसला है जिसके लिए लोग अपने गरम-गरम खून का नजराना देते हैं. कश्मीर के मसले के लिए जितने भी लोग लड़ने आए हैं, वे सब शहीद हैं.’  वरिष्ठ नेता बशीर ने कहा, ‘हम तो पहले से कहते आ रहे हैं. 1953 में जब लोकतांत्रिक तौर पर चुने गए प्रधानमंत्री को गिरफ्तार कर लिया गया. उसके बाद से जितने भी लोग मारे गए, वे सब शहीद हैं. ये जो पांच लोग मारे गए हैं वे भी शहीद हैं. सब शहीद हैं.’ आश्चर्य की बाते ये है कि एक पार्टी का नेता मारे गये आतंकियों को शहीद बोल जाता है लेकिन कोई भी राजनेता इसकी आलोचना तक नहीं कर सकता. शायद ये हिन्दुस्तान की वो धर्मनिरपेक्षता है जिसके लिए हमारे राजनेता लड़ते हैं तथा आतंकियों को शहीद बोल जाते हैं.

Share This Post