अगर आप जम्मू-कश्मीर के किसी व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े हैं तो एक एक शब्द ध्यान से पढियेगा इस खबर का..

अगर आप व्हाट्सएप्प चलाते हैं तथा जम्मू कश्मीर मैं रहते हैं तो निश्चित रूप से ये खबर आपके लिए है, या अगर आप जम्मू-कश्मीर के किसी व्हाट्सएप्प ग्रुप में जुड़े हुए हैं तो भी इस खबर का एक-एक शब्द आपके लिए महत्वपूर्ण है. आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में तनाव को कम करने और अफवाहों पर लगाम कसने के उद्देश्य से किश्तवाड़ के जिलाधिकारी ने व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिंस के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. जिलाधिकारी अंग्रेज सिंह राणा के आदेश के अनुसार ग्रुप के एडमिंस को 10 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है.
खबर के मुताबिक आदेश में रजिस्ट्रेशन न कराए जाने पर ग्रुप एडमिंस के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. जिसके तहत, एडमिंस पर इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी (आईटी) एक्‍ट, रणबीर पीनल कोड, साइबर क्राइम कानून के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

गौरतलब है कि किश्‍तवाड़ एसएसपी अबरार चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर इलाके में अफवाह फैलाने की बात कही थी, जिसके बाद जिलाधिकारी राणा ने आदेश जारी किया है. अबरार चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में कई व्हाट्एप ग्रुप पर आरोप लगाया था कि ये अफवाहें, गलत जानकारी और भ्रम पैदा करने वाली बातें फैला रहे हैं. जिलाधिकारी ने कहा कि अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के तहत सोशल मीडिया पर अपनी बातें रखी जा सकती हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ जिम्मेदारी और बंधन भी होते हैं. लोगों को और व्हाट्सएप ग्रुप एडमिंस को इस जिम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए बल्कि इसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए.
साथ ही उन्होंने आपत्तिजनक चीजें पोस्ट करने वाले लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि उनका यह आदेश नागरिकों की अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता पर रोक लगाने के लिए नहीं बल्कि ग्रुप एडमिंस को सचेत करने के लिए है. ताकि किसी आपत्तिजनक कंटेंट पर समय रहते कार्रवाई की जा सके या फिर ऐसे कंटेंट पर रोक लगाई जा सके.

किश्‍तवाड़ को एक ‘संवेदनशील इलाका’ बताते हुए उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया, खासकर व्‍हाट्सएप ग्रुप पर कई प्रकार की अफवाहें और आपत्तिजनक कंटेंट फैलाया गया जिससे वहां के लोगों के बीच तनाव उत्पन्न हो रहा था. किश्तवाड़ जम्मू कश्मीर में सबसे कम जनसंख्या वाले जिलों में कारगिल और लेह के बाद तीसरे नंबर पर आता है. राणा द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्रुप एडमिंस को देश-विदेश में रहने वाले सभी ग्रुप सदस्यों की जानकारी दर्ज करानी होगी. साथ ही अगर किसी ग्रुप कंटेंट पर सवाल खड़ा होता है या फिर पुलिस पूछताछ के लिए बुलाती है तो उन्हें उपस्थित होना पड़ेगा. ग्रुप का कोई सदस्य अगर किसी प्रकार की आपत्तिजनक पोस्ट करता है तो उसकी जानकारी ग्रुप एडमिंस अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में दे सकता है.जिलाधिकारी ने अपने आदेश में ग्रुप एडमिंस को सभी प्रकार की जानकारी (पोस्ट, वीडियो, ऑडियो) को सबूत के तौर पर रखना होगा. साथ ही रजिस्ट्रेशन के दौरान ग्रुप एडमिंस को यह लिखित में यह देना होगा कि अगर वो कानून का उल्लंघन करते पाए गए तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा. साथ ही उनका पेज और ग्रुप बंद कर दिया जाएगा. कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में कई बार व्हाट्सएप्प पर झूठी फेक खबरें फैलाकर तनाव पैदा किया गया है, इसलिए अब ग्रुप बनाने के १० दिन के अंदर रजिस्ट्रेसन कराना अनिवार्य होगा.

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