#ModiRaj ने नोंच डाले कई नकाब… MBA और इंजीनियरिंग छात्रों का खुलासा जो बन चुके हैं आतंकी

ये हिन्दुस्तान की बिडम्बना ही कही जायेगी कि हिन्दुस्तान को नेस्तानाबूद करने का सपना देखने वाले इस्लामिक आतंकियों की काली करतूतों पर पर्दा डालने के लिए हिन्दुस्तान के अंदर ही बैठे त्थाकथिति बुद्धिजीवी तमाम तरह के कुतर्क गढ़ते हैं. देश को लहूलुहान करने वाले आतंकियों के बचाव में तमाम तरके गढ़ते हैं. कभी उन्हें बेरोजगार बताते हैं, तो कभी अशिक्षा का शिकार बताते हैं तथा इस बहाने देश की सरकार को कटघरे में खड़ा कर देते हैं. अभी भी जब कश्मीर का कोई भी मुसलमान आतंकी गतिविधियों में पकड़ा जाता है तो धर्मनिरपेक्षता के तथाकथित ठेकेदार उनके पक्ष में खड़े हो जाते हैं तथा किसी न किसी बहाने से सर्कार को ही दोषी ठहरा देते हैं.

2014 में देश में भाजपा की सरकार बनने तथा श्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमन्त्री बनने के बाद देश में काफी बदलाव आया है, ये अलग बात है कि कोई इसको देखते हुए भी जानबूझकर न देखना चाहे तथा अंधविरोध में लगा रहे. देश में मोदीराज कायम होने के बाद से ही सबसे बड़ी चोट आतंक तथा आतंक के श्रोतों पर की गयी है. ये मोदीराज ही है जिसमें देश विरोधी ताकतों के नकाब नोंच डाले गये हैं तथा देश में मोजूद देश विरोधी शक्तियाँ तथा आतंकियों की वास्तविकता को देश के सामने लाया गया है. आतंकवाद में शामिल मुसलमानों के बचाव के सबसे बड़े तर्क कि अशिक्षा के कारण ये युवा हथियार उठाते हैं, अब मोदीराज में इस थ्योरी को भी एक्सपोज कर दिया गया है.

जम्मू कश्मीर से एक रिपोर्ट जारी हुई है जिसके अनुसार कश्मीर से पढ़े लिखे मुसलमान आतंकी बन रहे हैं. उनका स्पष्ट मानना है कि उनके लिए ये शिक्षा नहीं बल्कि तालीम मायने रखती है और यही कारण है कि वह हिंदुस्तान के खिलाफ जंग को तैयार हो रहे हैं. खैर ये लोग तालीम लेकर देश के खिलाफ हथियार उठाते हैं तो भारतीय अपनी बन्दूकों से इन्हें उनकी हकीकत से रूबरू करा देती है, उन्हें दफ़न कर देती है. राज्य पुलिस के सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 127 कश्मीरी मुसलमानों ने हाथों में हथियार उठा लिया, जो कि दिखाता है कि हर तीन दिन में एक युवा ने आतंकवादी बनने की राह पकड़ ली. इस साल करीब 27 मुस्लिमों ने आतंकवाद के रास्ते को चुन लिया.

लेकिन इसका आश्चर्य देखिये कि आतंकी बनने वाले ये मुस्लिम युवा अशिक्षित नहीं हैं बल्कि कोई MBA है तो कोई इंजीनियर है, कोई मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुका है तो कोई पोस्ट ग्राजुएष्ण कर रहा है. मोदी सरकार में आतंक के उस नकाब को नोंच कर फेंक दिया गया है जिसके पीछे ये छिपा होता था कि गरीबी, बेरोजगारी या शिक्षा के अभाव के कारण ये लोग आतंकी बनते हैं. इस रिपोर्ट से साबित होता है कि आतंकी बनने में गरीबी या अशिक्षा का योगदान नहीं होता है बल्कि उनको मिले वास्तविक संस्कारों तथा परवरिश का योगदान होता है.

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