जवानों ने बड़ी मेहनत से मारा था जिन जल्लादों को उन्हें मिल रही बंदूकों की सलामी…अब तो सवाल बनता ही है कि शहीद कौन ?

देश को दहलाने की कोशिश करने वाले, भारतमाता को लहूलुहान करने वाले, माँ भारती के सपूतों की जान लेने वाले आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना अपने प्राणों को दांव पर लगा देती है. मेरा देश घायल न हो जाये इसके लिए सेना के जवान निज प्राणों की परवाह नहीं करते तथा देश के दुश्मनों से भिड़ते हैं. इनसे लड़ते हुए सेना बलिदान भी देती है लेकिन इन आतंकियों के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देती.

लकिन जब यही सेना इन आतंकियों को मार गिराती हैं, इन आतंकियों को दफन कर देती है तो उसके बाद वो कौन लोग हैं जो आतंकियों के समर्थन में रैली करते हैं मारे गये आतंकियों को सलामी देते हैं.  सेना ने जहाँ देश के देश के दुश्मन को मार गिराया तब उस आतंकी को देश के अंदर रहने वाले वाले लोग ही सलामी दे रहे हैं तो ये बहुत हु शर्मनाक बात है. अगर आतंकी को सलामी देना उचित है तब ये भी बताया जाए कि वास्तविक शहीद ये आतंकी है या इन आतंकियों के खिलाफ देश की सुरक्षा के लिए अपना बलिदान देने वाला सेना का जवान.

रविवार को भरतीय सेना ने लश्कर आतंकी आशिक हुसैन भट्ट को मार गिराया था. लेकिन कल सोमवार को उसके जनाजे में न सिर्फ  सैकड़ों लोगों की भीड उमड़ी बल्कि भीड़ में हथियारों के साथ मौजूद आतंकी के समर्थकों ने गन सैल्यूट देकर आशिक हुसैन भट्ट को सलामी दी. ये हिंदुस्तान के लिए बहुत ही शर्म की बात है कि अपनी जान पर खेलकर सेना के जांबाज जवानों ने जिस दुश्मन को मार गिराया उसके समर्थन में इतनी बड़ी भीड़ खड़ी हुई व उसको सेल्यूट किया. इन लोगों के लिए वास्तविक शहीद आशिक हुसैन भट्ट है न कि देश के लिए जान देने वाले सैनिक.

लेकिन इस सबके बाद भी देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर भारतीय सेना के साहस, शौर्य, धैर्य व बहादुरी को सुदर्शन चैनल सेल्यूट करता है नमन वन्दन करता है.

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