कश्मीर की घाटियों से ही नही बल्कि जेलों से भी संचालित हो रहा था आतंकवाद.. जेलों से बरामद हुआ दंगों का सामान

मोदी राज में अलगाववादियों के पसीने छूट रहे है। आतंकियों के नापाक इरादों को देखते हुए NIA इन अलगाववादियों को हिरासत में ले रहा है। लेकिन NIA के

काम पर भी कुछ मौलवी रोड़ा अटका रहे है। ऐसा करके वो खुद ही अपने आप को अलगाववादियों का समर्थक साबित कर रहे है। अगर इन अलगाववादियों को

नहीं पकड़ा जाए तो इनके आतंक से कैसे बचा जाएगा।

क्या ये मौलवी बचाएंगे आतंकी हमलो से? गिलानी जो वर्षो तक किसी के हाथ नहीं आया उसे NIA ने दबोचा।

आतंकवाद के चलते अब एक जम्मू-कश्मीर के

बारामुला जिले में कैदियों से 20 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बिना अलगाववादियों के जेल में कैसे फोन और भड़काने वाले देश विरोधी दस्तावेज वहा मौजूद

आतंकियों पर आ गए। अलगाववादियों के खात्मे के लिए NIA का योगदान अहम् है।

बता दें कि पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार एक सूचना के आधार पर बारामुला जिला जेल में पुलिस और जेल प्रबंधन ने मंगलवार देर रात साझा तलाशी

अभियान छेड़ा गया।

पुलिस और जेल प्रशासन के देर रात छापे मारने पर 20 मोबाइल फोन और कुछ भड़काने वाले देश विरोधी दस्तावेज बरामद हुए। पुलिस इस

मामले की जांच कर रही है कि प्रतिबंधित होने के बावजूद भी इतने मोबाइल फोन और ऐसे दस्तावेज जेल के अंदर कैसे पहुंचे?

उक्त जेल में कई खतरनाक आतंकी बंद हैं, इसलिए इसमें आतंकी कनेक्शन होने की आशंका भी जताई जा रही है। जेल में मोबाइल्स का मिलना किसी आतंकी

हमले को अंजाम देने की साजिश की तरफ भी इशारा करता है। बरामद हुए सभी फोन और दस्तावेजो की जाँच होगी और कॉल डिटेल सामने आने के बाद सब कुछ

पता चल जाएगा।

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