Breaking News:

हिंदुत्व को बचाने के लिए जनजाति सुरक्षा मंच की मांग के बाद आदिवासियों में जबरदस्त उत्साह का संचार और पस्त हुए धर्मान्तरण के गुनाहगार

झारखण्ड में आदिवासी हिन्दुओं के धर्मान्तरणकारियों के खिलाफ अब जनजाति सुरक्षा मंच ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के सामने जो मांग रखी है, उससे आदिवासियों में उत्साह का संचार हो गया है. जनजाति सुरक्षा मंच ने मुख्‍यमंत्री रघुवर दास से मांग की है कि जिन आदिवासियों ने धर्म परिवर्तन कर लिया है, उन्‍हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए. जनजाति सुरल्ष सुरक्षा मंच की इस मांग का आम आदिवासी भी समर्थन कर रहे हैं.

मंच की ओर से कहा गया कि जनजातीय समुदाय के कुछ लोग धर्म बदलनेके बाद भी जनजातीय प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, जबकि जनजातीय समुदाय के वंचितों को आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है. वैसे लोग आरक्षित पदों पर सरकारी नौकरियां कर रहे हैं. स्‍व. कार्तिक उरांव ने भी इसका विरोध किया था. बता दें कि  रविवार को जनजाति सुरक्षा मंच के तत्‍वावधान में मोराबादी में जनसभा का आयोजन किया गया. जनसभा के बाद मुख्‍यमंत्री को 10 सूत्री मांगपत्र सौंपा गया.

जनजाति सुरक्षा मंच ने मुख्यमंत्री को जो 10 सूत्री मांगपत्र सौंपा है, इसमें उनकी मुख्‍य मांग धर्म परिवर्तन कर चुके जनजातीय समुदाय के लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं देना है. मंच के प्रांत संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि जिन जनजातीय बच्‍चों के माता-पिता जनजाति धार्मिक आस्‍था और परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं, उन बच्‍चों का जाति प्रमाण पत्र बनना चाहिए तथा जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया है, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले से अंग्रेजों द्वारा स्‍थापित चर्च की आड़ में जनजाति समाज का धर्मांतरण कर हमारी पहचान मिटाने की चेष्‍टा की गयी है. आजादी के 72 साल बाद भी ईसाइ मिशनरियों के द्वारा झारखंड में जनजाति समाज की लाखों एकड़ जमीन अस्‍पताल और स्‍कूल के नाम पर लेकर उसपर चर्च का निर्माण किया गया और जनजातियों का धर्मांतरण कराया गया. धर्म बदलते ही हमारे जनजातीय भाई सामाजिक रीति-रिवाज, पूजा, परंपरा और संस्‍कृति से वंचित हो जा रहे हैं.

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने हेतु हमे आर्थिक सहयोग करे. DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW