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राज्यसभा में श्रीराम के अपमान पर हंसने वाले विधानसभा में रघुदास जी के इस बयान पर मचा रहे हंगामा

आम आदमी से जुड़े मुद्दों जैसे बेहतर आधारभूत सुविधाएँ, सामाजिक न्याय, सबके लिए शिक्षा और रोज़गार, भ्रष्टाचार से मुक्ति , शासन प्रशासन में पारदर्शिता इत्यादि से देश के हर नागरिक चाहे वो किसी भी धर्म, जाति, लिंग या क्षेत्र का हो को जूझना ही पड़ता है. लोकतान्त्रिक देश में सबसे महत्त्वपूर्ण है चुनाव के आधार पर आम लोगों की सत्ता में भागीदारी. राजनीति ने समाज की दशा और दिशा के निर्देशन का भी काम किया है.

पिछले दशक में एक के बाद एकभ्रष्टाचार के खुलासों, साम्प्रदायिक और भाई-भतीजावाद पर आधारित राजनीति के कारण बनी परिस्थितियों ने अपनी ही बनाई जनतांत्रिक व्यनवस्था , अपने ही वोट से चुने हुए दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के अत्यंत अस्वी कार्य आचरण को लेकर मर्माहत हैं और मोहभंग के दौर से गुजर रहे हैं.भारतीय जनता पार्टी के नेता और झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेताओं के खिलाफ असंसदीय भाषा का प्रयोग किया है

.मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घटना 15 दिसंबर की है, जब झारखंड में पक्ष और विपक्ष के नेताओं में किसी मसले पर बहस हो रही थी.इस दौरान रघुबर दास विधानसभा अध्यक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि – सरकार बनने के साथ ही स्थानीय नीति परिभाषित की, और अध्यक्ष महोदय मैं चुनौती देता हूं, अभी तक 24 हजार 656 स्थानीय नियुक्ति हुई है अध्यक्ष महोदय और 1 हजार ही बाहर हुए हैं, 95 परसेंट झारखंड के नौजवान नियुक्त हुए है.और इनको झंडा ढोने के लिए नहीं मिल रहा है

इसलिए ये लोग बौखलाएं हुए हैं, स्थानीय नीति का विरोध कर रहे हैं.’

यह कहने के बाद सीएम दास बैठ गए लेकिन सदन में हंगामा चल रहा होता है. इसी दौरान हंगामें के बीच से आवाज आई कि घड़ियाली आंसू बहा रहे है.इस पर सीएम दास नाराज होकर कहते हैं ‘ले मिर्चा लग रहा है.’ रिपोर्ट्स के अनुसार पहले तो विपक्ष के नेताओं को बात समझ नहीं आई लेकिन जब पता चला तो उन्होंने और हंगामा शुरू कर दिया.नेता विपक्ष हेमंत सोरेन ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और सीएम का पुतला फूंक कर माफी की मांग की.

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