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गाय कटने से रोकने गये पुलिस वालों पर बमों से हमला.. उभर कर सामने आ रहा कट्टरपंथ के संक्रमण का स्तर


एकतरफ उन्होंने ईद पर अमन की चैन की, प्यार मोहब्बत की दुआ की लेकिन वहीं दुसरी तरफ हिन्दुओं की पूज्य गौमाता का क़त्ल भी किया था. मजहबी उन्मादियों के हौसले यही नहीं रुके बल्कि जब गोकशी की सूचना पर पुलिस पहुँची तो पुलिस टीम पर ही हमला कर दिया. मामला झारखण्ड के पाकुड़ जिले के महेशपुर थाना क्षेत्र के डांगापाड़ा गाँव का है. गौहत्या की सूचना पर पहुँची दौरान बम फेंके गए और गोलियां चलाई गईं. जवाब में पुलिस ने पहले लाठियां भांजी, आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर फायरिंग की. दिनभर चले संघर्ष में उपायुक्त (डीसी), थाना प्रभारी समेत दस पुलिसकर्मी और दस ग्रामीण घायल हो गए. कुल 21 घायलों में दो ग्रामीणों को गोली लगी है. उनका उपचार किया जा रहा है. पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है.

खबर के मुताबिक़, पुलिस को सुबह करीब 11 बजे फोन पर सूचना मिली कि डांगापाड़ा गांव में खुले में प्रतिबंधित जानवर काटे जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस पार्टी छापेमारी करने रवाना हुई। गांव में जाकर देखा तो सूचना सही थी और कुछ प्रतिबंधित जानवर काटे जा रहे थे। पुलिस ने संबंधित लोगों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। इतने में ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने लाठी-डंडे के अलावा ईट, पत्थर चलाना शुरू कर दिया। इस हमले में दो एएसआई सहित चार पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। पुलिस टीम किसी तरह जान बचाकर भागी। इसकी सूचना फौरन वरिष्ठ पदाधिकारियों को दी गई। इसके बाद उपायुक्त दिलीप कुमार झा, एसएसपी शैलेंद्र प्रसाद वर्णवाल, महेशपुर के एसडीपीओ शशि प्रकाश, एसडीओ जितेंद्र कुमार देव बड़ी संख्या में फोर्स के साथ गांव पहुंचे, तब तक हमला करने वाले ग्रामीण गांव छोड़ कर भाग चुके थे।

उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही थी। इसी बीच शाम चार बजे ग्रामीण फिर इकट्ठा हो गए और पुलिस टीम पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव के साथ बम चलाए और फायरिंग की। जवाब में पुलिस ने भी गोलियां चलानी शुरू कर दीं। पुलिस ने करीब 100 राउंड गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े। करीब एक घंटे तक चले संघर्ष में हिरणपुर थाना प्रभारी समेत दो पुलिसवाले और दस ग्रामीण घायल हो गए। इनमें दो ग्रामीणों को गोली लगी। गोली लगने से जख्मी ग्रामीणों का प्राथमिक उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराने के बाद वहां से पाकुड़ सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इसके बाद दोनों ग्रामीणों की मौत की अफवाह फैली। बाद में पता चला कि दोनों ग्रामीण घायल हैं और पुलिस की चौकसी में उनका उपचार चल रहा है.


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