मासूमों की तस्करी के बाद धर्मान्तरण की मशीनों पर जनता का प्रहार.. बाँध लिए 25 पादरी, पुलिस न आती तो होने ही वाला था अनर्थ

हाल ही में झारखंड में एसआई संस्थांनों से बच्चों की तस्करी का संगीन मामला सामने आया था, जिसके बाद ईसाई मिशनरियों पर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए थे. लेकिन शायद शायद ईसाई मिशनरियों पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा और इस उन्होंने कोशिश की हिन्दुओं के धर्मांतरण की. लेकिन बच्चों की तस्करी की घटना से आक्रोशित हिन्दू समाज को जब धर्मान्तरण की भनक लगी तो जनता का कहर धर्मान्तरण की मशीनों पर टूट पड़ा तथा २५ धर्मांतरणकारियों को को बंधक बना लिया. अगर समय पर पुलिस न पहुँची होती तो शायद अनर्थ हो जाता.

मामला झारखण्ड के दुमका जिले के शिकारीपाड़ा के फुलपहाड़ी गांव का है. खबर के मुताबिक़, ईसाई धर्म का प्रचार करने पहुंची 25 सदस्यीय टीम को शिकारीपाड़ा के फुलपहाड़ी गांव के लोगों ने गुरुवार रातभर बंधक बनाकर रखा. शुक्रवार सुबह पुलिस ने ग्रामीणों के कब्जे से मुक्त कराकर हिरासत में ले लिया. आरोप है कि ये लोग जबरन धर्मांतरण की कोशिश कर रहे थे. फुलपहाड़ी गांव के प्रधान रमेश हेम्ब्रम ने ईसाई धर्म प्रचारकों पर कानूनी कार्रवाई के लिए शिकारीपाड़ा थाने में लिखित बयान दिया है. शिकायत में कहा है कि प्रचारकों ने मना करने के बाद भी न केवल ईसाई धर्म का प्रचार किया, बल्कि गांव के जाहेर थान और मांझी थान के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी भी की. इन स्थलों की पूजा छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने को कहा तथा प्रलोभन भी दिया कि हम आप लोगों को सारी सुविधाएं देंगे. पहले भी ये लोग गांव में धर्मांतरण की कोशिश कर चुके हैं. धर्म प्रचारकों को मुक्त कराकर पुलिस हिरासत में रखा गया गया है.

दुमका के एसपी किशोर कौशल ने मामले की जांच के लिए डीएसपी को शिकारीपाड़ा भेजा है. बताया कि जबरन धर्म परिवर्तन कराने की शिकायत मिली है तथा मामले की जाँच पूरी होते ही आरोपियों पर कार्यवाही की जाएगी. फुलपहाड़ी में पकड़े गए 25 धर्म प्रचारकों की टीम में 14 पुरुष और 11 महिलाएं हैं. इनमें पांच नाबालिग हैं. प्रचारकों की टीम में प.बंगाल के रामपुरहाट और सिउड़ी के साथ ही शिकारीपाड़ा के स्थानीय लोग भी हैं.

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