धर्मान्तरण के खिलाफ खुद आदिवासियों ने बुलंद की आवाज… बोले– “विदेशी खतरे के चलते संकट में हैं हमारी परंपराएं”

आये दिन ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों के धर्मान्तरण कराने की खबरें सामने आती रहती हैं लेकिन अब आदिवासियों ने भी ईसाई धर्मान्तरणकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है तथा कहा कि मिशनरी आक्रान्ताओं के कारण आदिवासी सभ्यता, संस्कृति और परंपरा खतरे में है. विदेशी शक्तियां लगातार हमला कर रही हैं. ऐसे में आदिवासी परंपरा, संस्कृति और रीति रिवाज को बचाने के लिए जरूरी है कि आदिवासी परंपरा, रीति रिवाज और संस्कृति को मानने वालों को ही आदिवासियों को मिलने वाले सरकारी लाभ दिए जाएं. वे जो आदिवासी परंपरा, रीति रिवाज और संस्कृति का निर्वहन नहीं कर रहे हैं उन्हें सरकार आदिवासियों को मिलने वाले आरक्षण समेत तमाम लाभों से वंचित करे. ये मांग केंद्रीय सरना समिति फूलचंद गुट ने राज्य सरकार से की है.

केंद्रीय सरना समिति फूलचंद गुट के अध्यक्ष ने कहा कि विदेशी धर्म अपनाने वाले आदिवासी दोहरा लाभ ले रहे हैं. वहीं उनके दोहरे लाभ लेने के कारण आज आदिवासी धर्म, संस्कृति और परंपरा खतरे में पड़ गई है. फूलचंद गुट के केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज पर विदेशी धर्म द्वारा चारों तरफ से हमला किया जा रहा है, हमारे धर्म पर हमला किया जा रहा है. संस्कृति, आरक्षण, हक और अधिकार सबकुछ लूटा जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो विदेशी धर्म को मानते हैं, ईसाई मिशनरीज आदिवासी समाज में घुसपैठ कर समाज को तोड़ मरोड़कर जो उसे मिलने वाले हक अधिकार हैं, उन्हें लूटने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आदिवासी महिला से गैर आदिवासी पुरुष शादी करते हैं. हमारी मांग है कि इससे जो लाभ मिलता है उसे सरकार बंद करे. उन्होंने कहा कि मिशनरियां आदिवासी समाज को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं, इसको रोका जाना जरूरी है. उन्होंने आदिवासी समाज से ही आह्वान किया कि अपनी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं को प्यार करना सीखो तथा विदेशी धर्म के लोगों के आक्रमण को विफल करो. अगर ये सब अभी भी नहीं रोका गया तो आदिवासी समाज का अस्तित्व ही मिट जाएगा.

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