एक बिल्डिंग जिस पर मांग थी अब्दुल कलाम का नाम रखने की लेकिन कांग्रेस ने उसे नाम दिया टीपू सुल्तान का..

मिसाइलमैन के नाम से जाने जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वो नाम है जिन्हें हर राष्ट्रवादी सर झुकाता है. डॉ. कलाम निश्चित ही हिंदुस्तान का गौरव थे. अगर आपको डॉ. कलाम तथा हत्यारे टीपू सुलतान में से एक को चुनना पड़े तो निश्चित ही अब्दुल कलाम को चुनेंगे. लेकिन कर्णाटक की कांग्रेस तथा जेडीएस की सरकार ऐसा नहीं सोचती है. कर्नाटक सरकार को अब्दुल कलाम से ज्यादा टीपू सुलतान प्रिय है.

आपको बता दें की कर्नाटक के हज भवन का नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है. जब ये बात भारतीय जनता पार्टी के संज्ञान में आयी तो भाजपा ने हज भवन का नाम अब्दुल कलाम के नाम पर रखने की बात कही लेकिन कांग्रेस ने टीपू सुलतान का नाम बढ़ा दिया. इसके बाद ‘हज भवन’ का नाम बदलने की योजना पर विवाद हो गया है. विवाद के बीच एक बार फिर भाजपा नेता केजी बोपैया ने कहा कि उनकी पार्टी इस भवन का नाम दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति एपी जे अब्दुल कलाम के नाम पर रखना चाहती है. बोपैया ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा सहित हमारी पार्टी के नेता चाहते हैं कि हज भवन का नाम टीपू सुल्तान की बजाए पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलामजी के नाम पर रखा जाना चाहिए. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बोपैया ने आशंका जताई कि अगर कर्नाटक सरकार टीपू सुल्तान के नाम पर हज भवन का नाम रखती है तो इससे पूरे राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता है. बता दें कि अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री बी जेड जमीर अहमद खान के 22 जून को दिए गए बयान पर भाजपा नेता प्रतक्रिया दे रहे थे.

बी जेड जमीर अहमद खान ने कहा था कि वह मुख्यमंत्री के साथ हज भवन का नाम बदलकर ‘हजरत टीपू सुल्तान हज घर’ करने की मांग पर चर्चा करेंगे. भाजपा हज भवन का नाम बदलने की योजना का विरोध करते हुए कह रही है कि यह इमारत पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए है न कि सिर्फ टीपू के अनुयायियों के लिए है. वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री आर अशोक ने कहा था कि हज भवन येदियुरप्पा सरकार की विकास परियोजनाओं का हिस्सा था और कांग्रेस सरकार अब इसे टीपू सुल्तान के नाम पर रखकर अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रही है.

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