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अकेले पड़े JDS और कांग्रेस के नेता… धरना स्थल सिर्फ नेता ही नेता.. जनता की भीड़ येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण में

15 मई को कर्नाटक को जब विधानसभा चुनाव परिणाम आये तो राज्य की जनता ने सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया तथा भारतीय जनता पार्टी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी. भाजपा ने राज्य में १०४ सीटों पर विजय पाई, हालाँकि भाजपा बहुमत के लिए जरूरी 112 से 7 सीटें कम रह गयी. वहीं कांग्रेस ने ७८ और JDS ने 37 सीटों पर जीत हासिल की. भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने उस जेडीएस को मुख्यमंत्री पद देने की साजिश रची जिसे जनता ने पूरी तरह से नकार दिया था.

हालाँकि कांग्रेस की ये साजिश कामयाब न हो पाई तथा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी भाजपा को राज्यपाल ने सरकार बनाने का न्यौता दिया तथा भाजपा की तरफ से बीएस येदियुरप्पा ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है. भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस पार्टी ने रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवा लिया, हालाँकि सुप्रीम कोर्ट में भी कांग्रेस पस्त हो गयी तथा सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि वह येदियुरप्पा को सरकार बनाने से नहीं रोक सकते हैं.

पहले जनता की अदालत में और फिर सुप्रीम कोर्ट में मात खाने के बाद बार-2 संविधान का हवाला दे रही जेडीएस तथा कांग्रेस के विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट ने आदेश को दरकनिकार करते हुए बेंगलोर में विधानसभा के सामने धरना शुरू कर दिया. कांग्रेस तथा जेडीएस को उम्मीद थी कि इस बहाने उन्हें जनता सपोर्ट करेगी.  हालाँकि एक बार फिर कांग्रेस का ये दांव भी असफल हुआ तथा जेडीएस तथा कांग्रेस के इस धरने को आम जनता का समर्थन नहीं मिला. इस धरने में केवल कांग्रेस तथा जेडीएस के नेता ही शामिल हुए जबकि आम जनता ने येदियुरप्पा की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी का जश्न मनाया. राज्य के वर्तमान हालातो में कांग्रेस तथा जेडीएस पूरी तरह से अकेले पद चुके हैं. न उन्हें जनता का साथ मिल रहा है और और न्यायलय में भी पटखनी मिल रही है.

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