आतंकियों को धरती का बेटा बता रही है कश्मीर की राजनीति का एक हिस्सा.. सवाल ये है कि फिर सैनिक कौन ?


जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री तथा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती का मानना है कि आतंकी इसी धरती के बेटे हैं, लिहाजा उन्हें                                     बचाने की कोशिश करनी चाहिए तथा राज्य में बन्दूक की संस्कृति को ख़त्म करना चाहिए.

 

सत्ता पाने के लिए राजनीति को कितने नीचे गिराया जा सकता है, इसका बड़ा उदाहरण बनकर उभर रही हैं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती. महबूबा मुफ्ती ने हिंदुस्तान के सैनिकों के खून के प्यासे आतंकियों को धरती का बेटा करार दिया है. कह्बूबा मुफ्ती ने स्थानीय आतंकियों को इसी धरती का बेटा कहते हुए कहा कि इन्हें बचाने की कोशिश करनी चाहिए. जम्मू-कश्मीर से बंदूक की संस्कृति को खत्म करने के लिए केंद्र को आतंकी नेतृत्व से बातचीत की पहल भी करनी चाहिए.

मंगलवार को पत्रकारों से महबूबा ने कहा कि पाकिस्तान तथा अलगाववादियों से तत्काल बातचीत की पहल करनी चाहिए. इसी प्रकार आतंकवादी संगठनों से भी बातचीत करनी चाहिए क्योंकि जिसके हाथों में बंदूक है वही इस बंदूक संस्कृति को खत्म कर सकता है. मेरा मानना है कि एक स्टेज पर अलगाववादियों के साथ ही आतंकियों से भी बातचीत करनी चाहिए तथा स्थानीय आतंकियों को हिंसा के रास्ते पर जाने से रोकना चाहिए.

उन्होंने कहा कि 1996 में जबसे वह राजनीति में आई हैं तबसे देखा है कि स्थानीय आतंकी धरती पुत्र हैं.  इन्हें बचाने का अधिक प्रयास होना चाहिए क्योंकि वह हमारी धरोहर हैं. यदि कोई मुठभेड़ शुरू होता है तो आतंकी व सुरक्षा बल आमने-सामने होते हैं. उस समय कोई कुछ भी नहीं कर सकता है. सत्ता पाने के लिए महबूबा ने तो आतंकियों को धरती पुत्र करार दिया है लेकिन यहाँ सवाल ये खड़ा होता है कि हिंदुस्तान तथा हिंदुस्तान के सैनिकों को अपना दुश्मन मानने वाले आतंकी अगर धरती के बेटे हैं तो देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिक क्या हैं ?


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