क्या राजनीति सदा मांगती हैं ईमानदार अधिकारी का बलिदान ?IAS अधिकारी H.C मेहता के बाद अब बयानब़ाज नेताओं के निशाने पर है श्री विनोद राय

भारत की राजनीति भी अजीब है . इसमें आज तक शायद ही किसी ने कभी अपना दोष माना हो . इस राजनीति के तमाम गलत और आत्मघाती फैसले जो अक्सर किसी नेता की जिद ही थे , उसे किसी ईमानदार अधिकारी के मत्थे पर लगा कर खुद फिर से जनता के बीच चले गये तथाकथित नेता जी . अभी कुछ दिन पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के अधीनस्थ बेहद ईमानदार छवि वाले माने जाने वाले IAS अधिकारी श्री H C मेहता की बलि ले ली गयी जहाँ उन्हें दोषी ठहरा दिया गया जबकि उनके पास तो अपनी खुद की पैरवी तक के लिए पैसे नहीं बचे थे . ठीक उसी राह पर ले जाने की तैयारी है श्री विनोद राय जी को जिन्होंने भारत के अनेक भ्रष्टाचारी सफेदपोशों के असली चेहरे जनता के सामने लाये हैं वो भी भारी दबाव के बीच में . 

विदित हो कि सडक पर गाय काटने वाली पार्टी केरल के कांग्रेस अध्यक्ष एमएम हसन ने देश के पूर्व नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक (कैग) विनोद राय को आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाते हुए झूठा बयान दिया हैं कि वो भारतीय जनता पार्टी के एजेंट हैं जिन्हें राय व पार्टी को 2जी मामले में बरी किया गया है.एस मामले पर जबकि गुरुवार (21 दिसंबर) को सीबीआई विशेष अदालत ने डीएमके नेता कनिमोई और ए राजा समेत सभी 14 आरोपियों को बरी कर दिया है.अदालत का फैसला आने के बाद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने विनोद राय से माफी मांगने की मांग की.

हसन ने बिना पानी पार्टी के तमाम कारनामो के अन्दर झांके कहा कि   “यह काल्पनिक मामला था, जिसका भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जमकर प्रयोग किया और सत्ता पर आसीन हो गई.अब भाजपा और राय को माफी मांगनी चाहिए.” आरोप लगाया गया हैं की कैग का पद संभालने से पहले विनोद राय केरल के वित्त सचिव रहे थे और राज्य में नौकरशाह के तौर पर उन्होंने कई वर्षो तक विभिन्न पदों को संभाला था. जबकि श्री विनोद राय जी की छवि अब तक बेदाग ही रही और इस मामले में कहीं न कहीं जांच एजेंसी की ही तरफ से कमियां सामने आई .

उल्लेखनीय है कि विशेष न्यायाधीश ओ.पी.सैनी ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी सहित सभी आरोपियों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर 2जी मामलों में बरी कर दिया क्योकिं अभी सबूत सामने नहीं आए हैं. यहाँ जनमानस को ये जानने की जरूरत है कि एक अफसर की बलि ले कर खुद को चमकाने वाली राजनीति आज की नहीं बहुत पुरानी है साथ ही ऐसे सफेदपोशों के असली चेहरे सामने लाने वाले अधिकारी यकीनन बयानबाजी नहीं बल्कि सम्मान के पात्र होते है जो भारी दबाव में भी कर्तव्यपथ पर चलते रहते हैं . 

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