माथे पर टीका क्या लगा लिया कट्टरपंथी बन बैठे उसकी जान के दुश्मन… जबकि वो सिर्फ कक्षा 5 की मासूम थी..

कक्षा ५ में पढ़ने वाली हिना मलयिल माथे पर तिलक लगाकर मदरसा पहुँची तो कट्टरपंथी बौखला उठे तथा उस मासूम छात्रा की जान के दुश्मन बन गए. मदरसा संचालकों ने तुरंत बच्ची को मदरसे से बाहर कर दिया तथा कहा कि तिलक लगाना इस्लाम में हराम है और हिना ने तिलक लगाकर इस्लाम के खिलाफ काम किया है, इसलिए हिना को मदरसे में नहीं पढ़ने दिया जाएगा. इस्लामिक कट्टरपंथ का ये रूप उन तथाकथित बुद्धिजीवियों को आईना है जो सेक्यूलरिज्म का पाठ पढ़ाते रहते हैं. भाईचारे का सन्देश देने वाले तिलक लगाने वाली एक बच्ची को स्वीकार नहीं कर सकते हैं लेकिन आश्चर्य इसके बाद भी ये सहिष्णु कहलाते हैं.

मामला वामपंथ शासित केरल राज्य का है. खबर के मुताबिक़ मदरसे से निकाली गई छात्रा हिना मलयिल के पिता उमर मलयिल पोस्ट फेसबुक पर वायरल हो रहा है. उनका आरोप है कि मदरसे में चंदन का टीका लगाकर जाने की वजह से उनकी बेटी को निष्कासित कर दिया गया. पांचवी में पढ़ने वाली बच्ची के पिता का कहना है कि एक छोटी फिल्म में अभिनय करने की वजह से उसने माथे पर चंदन का टीका लगाया था. इस कार्रवाई के लिए मदरसा की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि मेरी बेटी भाग्यशाली है कि उसे पत्थर नहीं मारे गए. बच्ची के पिता उमर मलयिल का पोस्ट फेसबुक पर वायरल हो रहा है. इस पोस्ट को 6.3 हजार लाइक्स और 2700 से ज्यादा शेयर किया जा चुका है.

अपने पोस्ट में लड़की के पिता ने लिखा कि उनकी बेटी पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों जैसे खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी आगे है. इतनी टैलेंटेड होने के बाद भी उसे मदरसे से निकाल दिया गया. मलयालम में लिखे पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि बच्ची को मदरसे से बाहर निकाले जाने के पीछे जो कारण है वह बहुत ही अफसोसजनक है. मेरी बेटी को चंदन का टीका लगाने की वजह से मदरसे से बाहर कर दिया गया. उमर ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि उनकी 10 साल की बच्ची पढ़ाई के साथ-साथ एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी में भी आगे है. उसने स्कूल और मदरसा लेवल प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार जीते हैं, लेकिन उनकी बच्चे को तिलक लगाने के कारण मदरसे से बाहर निकाल दिया गया.

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