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पुलिस को मिली डायरी से सुलझ सकती है जवान रॉय मैथ्यू की खुदकुशी की गुत्थी

तिरुवनंतपुरम : सेना के जवान रॉय मैथ्यू के खुदकुशी मामले की गुत्थी सुलझ सकती है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस को उनके पास एक डायरी मिली है। जिसे जवान का सुसाइट नोट भी माना जा रहा है। मैथ्यू ने अपनी डायरी में लिखा है कि कोर्ट मार्शल से बेहतर तो मर जाना है। मैथ्यू ने इस डायरी में अपनी पत्नी और परिवार के लोगों से माफी भी मांगी है।

खुदकुशी से पहले मैथ्यू ने अपनी पत्नी से फोन पर बात भी की थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने अधिकारी को एक सॉरी का मेसेज भी भेजा था। यह अधिकारी सेना में कर्नल है जिनपर रॉय से सहायक का काम कराने का आरोप है। पुलिस डायरी में लिखी बातों की जांच कर रही है। आपको बता दें कि रॉय मैथ्यू केरल में कोल्लम जिले के एजूकॉन का रहने वाला था। उसका शव नासिक में देवलाली छावनी के खाली पड़े बैरक में एक कमरे की छत से लटका हुआ मिला।

पुलिस के मुताबिक, जवान का शव काफी सड़ चुका था और संभवतः उसकी मौत तीन दिन पहले ही हो गई थी। देवलाली कैंप पुलिस ने इस मामले में सूबेदार गोपाल सिंह की शिकायत पर दुर्घटना से मौत का मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल, मैथ्यू की मौत की वजह पता नहीं चल सकी है और पुलिस ने प्राथमिक औपचारिकताओं के बाद शव सेना के सुपुर्द कर दिया है।

वहीं, एक न्यूज वेबसाइट के स्टिंग में मैथ्यू और कुछ अन्य जवानों को आर्मी के बड़े अधिकारियों के सहायक के तौर पर काम करते दिखाया गया था। इन कामों में बड़े अधिकारियों के कुत्ते घुमाना और उनके बच्चों को स्कूल छोड़ना शामिल था। इस विडियो के सामने आने के कुछ दिनों बाद वह महाराष्ट्र के देवलाली कैंट में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले थे। वह सेना में गनर के पद पर तैनात थे।

हालांकि, कुछ समय बाद समाचार वेबसाइट ने स्टिंग वीडियो हटा दिया। इस मामले में सेना ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आयी है कि आत्महत्या श्रृंखलाबद्ध घटनाओं का परिणाम हो सकती है जो मीडियाकर्मी द्वारा उक्त जवान का किसी तरह से वीडियो बनाने के बाद हुई थीं, जिसमें उसकी एक सहायक के तौर पर ड्यूटी के बारे में सवाल किये गए थे तथा उसे जानकारी नहीं हुई।

सेना ने कहा कि इसकी बहुत संभावना है कि अपने वरिष्ठों को नीचा दिखाने का अपराध बोध या किसी अज्ञात व्यक्ति को गलत धारणा प्रेषित करने के चलते उसने ऐसा कदम उठाया। मैथ्यू के एक रिश्तेदार ने कहा कि उन्होंने 14 साल अपने देश की सेवा की थी। पूरा मामला बेहद संदेहास्पद नजर आ रहा है। कोई नहीं जानता कि उनके साथ क्या हुआ? शव लाने के बाद उसे जल्दी से जल्दी तिरंगे में लपेटने की परंपरा है, पर यह भी नहीं किया गया। जवान के रिश्तेदार ने शव का फिर से पोस्टमॉर्टम कराए जाने की अनुमति के लिए जिला कलेक्टर से मुलाकात की है।

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