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वहाबी सोच को आखिर क्यों पसन्द कर रहे ISIS के आतंकी ? केरल के 100 लोग बन चुके हैं आतंक के सौदागर

वहाबी विचारधारा सुन्नियों में एक समूह है जो किसी एक ख़ास इमाम के अनुसरण की बात नहीं मानता और उसका कहना है कि शरीयत को समझने और उसका

सही ढंग से पालन करने के लिए सीधे क़ुरान और हदीस (पैग़म्बर मोहम्मद के कहे हुए शब्द) का अध्ययन करना चाहिए. उनका मानना है कि किसी भी

विवादास्पद चीज़ में अंतिम फ़ैसला क़ुरान और हदीस का मानना चाहिए. मध्य पूर्व के अधिकांश इस्लामिक विद्वान उनकी विचारधारा से ज़्यादा प्रभावित हैं. इस

समूह के बारे में एक बात बड़ी मशहूर है कि यह सांप्रदायिक तौर पर बेहद कट्टरपंथी और मज़हबी मामलों में बहुत कट्टर है. सऊदी अरब के मौजूदा शासक इसी

विचारधारा को मानते हैं. अल-क़ायदा प्रमुख दुर्दान्त आतंकी ओसामा बिन लादेन भी इसी विचाराधारा का समर्थक था.

इस जानकरी से तो ये अंदाजा लगाया जा

सकता है कि इस विचारधारा को अपनाने से क्या होता है.

अब इसी वहाबी विचारधार को बढ़ावा देने के लिए वामपंथी केरल के 100 से ज्यादा युवा आईएसआईएस आतंकी संगठन ज्वॉइन कर रहे हैं। देश की इंटेलिजेंस

ब्यूरो ने सरकार को सतर्क करते हुए कहा कि राज्य के कई युवाओं ने वहाबी विचारधारा के लिए आतंकवाद का रास्ता अपना लिया है और इसके लिए सऊदी इसे

उत्तेजित करने के लिए ने 1,000 करोड़ रुपये दिए हैं।

केरल के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सलाफी ग्रुप और वहाबी धर्मोपदेशक राज्य में कट्टरवाद को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, इसी

वजह से राज्य से ज्यादातर युवा गायब हो रहे हैं। केरल में खुले आम वहाबी स्टाइल में धर्म उपदेश दिए जा रहे हैं, यही कारण है कि राज्य के करीब 75 मस्जिदों

को सऊदी अरब द्वारा कंट्रोल किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में केरल में कई मस्जिदों का निर्माण सऊदी अरब के निगरानी में स्थापित किए जाएंगे। केरल में युवा तेजी से वहाबी

विचारधार को ओर बढ़ रहे हैं, यह सिर्फ एक छोटा संकेत है दिख रहा है। केरल में युवा इस्लाम कट्टरवाद की ओर लगातार आकर्षित हो रहे हैं। इससे पहले केरल में

ओसामा बिन-लादेन और अजमल आमिर कसाब की मौत पर लोगों ने इन आतंकियों की शहादत में तस्वीरें लगाई थी।

अगर आपको बिना किसी से पूछे जानना है कि वह वहाबी विचारधारा का पालन कर रहा है या नहीं उसके लिए ये संकेत है. पुरुषों को दाढ़ी रखनी अनिवार्य है।

किसी भी तीर्थ स्थान पर जाना वर्जित है। सभी महिलाएं बुर्के में रहेंगी। सभी पुरुषों को अपनी पेंट को ऐडी से ऊपर पहननी होगी। महिलाएं काम करने के लिए

बाहर नहीं जा सकती, लेकिन अगर परिवार को जरूरत है तभी ऐसा कर सकती है। तेज से हंसना, टीवी देखना और म्यूजिक सुनना वर्जित है। अगर कोई भी

मज़हबी इन नियमो का पालन करता है वह वहाबी विचारधारा का है.

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