Breaking News:

सबरीमाला वाले प्रदेश की अदालत में माँगी गयी थी मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में जाने देने की मांग.. जानिये तब जज साहब का जवाब क्या था?

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए अपना फैसला सुनाया कि मंदिर में महिलाओं से भेदभाव करते हुए उन्हें प्रवेश से नहीं रोका जा सकता, इसलिए अब महिलायें सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी. जबकि हिन्दू धर्म में धार्मिक आधार पर महिलाएं सबरीमाला मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती थी. लेकिन इसके बाद केरल के ही कोर्ट में जब मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश के लिए लगाई याचिका पर माननीय कोर्ट ने जो जवाब दिया, उससे देश चौंक गया.

केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को मस्जिद में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश की मांग करने वाले एक हिंदू संगठन द्वारा दायर की गई याचिका खारिज कर दी है, जबकि एक मुस्लिम सुधारवादी संगठन ने खुद इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा की है. मुख्य न्यायाधीश ऋषिकेश राय न्यायमूर्ति एके जयकृष्णन नंबियार की एक खंडपीठ ने अखिल भारतीय हिंदू महासभा राज्य अध्यक्ष स्वामी साई स्वरुपनाथ की याचिका खारिज कर दी कहा की वे इसका साक्ष्य देने में नाकाम रहे हैं कि मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है.  स्वरुपनाथ ने तर्क दिया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में जाने की इजाजत दी गई थी, जहां 10 से 50 वर्ष की आयु के महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं थी इसी तर्ज पर मुस्लिम महिलाओं को भी सभी मस्जिदों में प्रार्थना करने की अनुमति दी जानी चाहिए. .

उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को सिर से लेकर पांव तक ढके रहना पड़ता है, ताकि उन्हें कोई देख न पाए, उन्होंने कहा कि इस तरह संविधान के अनुच्छेद 21 14 के उल्लंघन किया जा रहा है. हालांकि, अदालत ने याचिका खारिज कर दी कहा कि याचिकाकर्ता पर्याप्त सबूत पेश करने में असफल रहा है कि महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है. अदालत ने कहा कि सबरीमाला फैसले को इससे जोड़कर नहीं देखा जा सकता है, फिर भी अगर मुस्लिम महिलाओं को लगता है कि उनके साथ गलत किया जा रहा है, तो वे अदालत के समक्ष आवाज़ उठा सकती हैं.

Share This Post