भारत के सबसे कम उम्र के बलिदानी खुदीराम बोस को बंगाल की किताबों में बता दिया गया आतंकी.. उबल पड़े राष्ट्रभक्त

खुदीराम बोस.. ये भारतमाता के उस लाडले जांबाज बेटे का नाम है जिसने सबसे कम आयु में अंग्रेजी गुलामी की जंजीरों से भारतमाता को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था. मात्र १८ वर्ष ८ माह और ८ दिन की आयु में भारतमाता की जय का उद्घोष करते हुए जिस खुदीराम बोस ने हँसते हँसते फांसी का फंदा चूमा था, उस खुदीराम बोस की वीरता, उनके  बलिदान को उस स्वतंत्र भारत के एक राज्य की सत्ता द्वारा चुनौती दी गई है, जिस भारत को स्वतंत्र कराने के लिए खुदीराम बोस ने फांसी के फंदे को चूमा था.

आपको बता दें कि भारत के सबसे कम उम्र के बलिदानी खुदीराम बोस को पश्चिम बंगाल की किताबों में आतंकी बता दिया है. ये भारत की कथित सेक्यूलर राजनीति की  शर्मशार करने वाली  तस्वीर ही है जहाँ याकूब मेमन, अफजल गुरु, मकबूल भट्ट तथा बुरहान बानी जैसे दुर्दांत आतंकियों भटका हुआ बताकर उनके लिए आधी रात को कोर्ट खुलवा दिया जाता है लेकिन मात्र 18 वर्ष की आयु में देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले खुदीराम बोस को एक राज्य की किताब में आतंकी बता दिया जाता है.

आश्चर्य करने वाली बात तो ये है कि पश्चिम बंगाल सरकार की आठवीं की इतिहास की किताब में खुदीराम बोस को तो आतंकवादी बताया गया है. पांचवीं श्रेणी से लेकर 12वीं तक कई नये पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है. इसमें सिंगूर आंदोलन से लेकर कई अन्य ऐसे आंदोलनों को इसमें शामिल किया गया है, जिसकी नायिका ममता बनर्जी रही हैं. खुदीराम बोस संसार के सबसे कम उम्र के क्रान्तिकारी थे. फांसी के समय उन्होंने कहा था कि मैं बहुत गरीब हूँ, मेरे पास भारतमाता को देने के लिए कुछ भी नहीं हैं. मेरे पास सिर्फ मेरे प्राण हैं, जिन्हें मैं दे रहा हूँ.

ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ लड़ने के लिए उनके पेट मे केवल 1 समय का खाया अन्न का दाना था. उन्हें गिरफ्तार यहीं के तथाकथित अंग्रेज परस्तों ने तब करवाया था जब उन्होंने खाने के लिए ये कह कर रोटी मांगी कि -” अंग्रेजों से लड़ा हूँ, भूख लगी है , खाना खिला दो क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं हैं. ये वो समय था जब नेहरू जी के कपड़े फ्रांस जाते थे धुलने के लिए और उनकी एक विदेश यात्रा में ही इतना पैसा खर्च हो जाता था जितना तो काकोरी की ट्रेन लूट कर फांसी चढ़ गए हमारे बिस्मिल जैसे तमाम बलिदानी नहीं जुटा पाए थे/

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