दरिंदगी का चेहरा बन रहे एक ही सोच वाले.. महिला का अपहरण कर 2 दिनों तक बलात्कार किया.. दरिंदों के नाम सरफराज और बबलू सैफी

आखिर वो कौन सी सोच है जो महिलाओं के खिलाफ अपनी व्यभिचारी सोच को बदलने का नाम नहीं ले रही है. केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा पुलिस प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी वो कौन सी सोच है जो महिलाओं को, बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बना रही है? जब एक व्यक्ति जिसको जन्म ही महिला देती है, इसके बाद भी आखिर वह किसी महिला के साथ दुष्कर्म कर कैसे लेता है? ये जानते हुए भी कि उसके घर में भी बहन है बेटी है, फिर भी दूसरों की बहन-बेटियों को हवस का शिकार कैसे बना लेता है? सवाल ये भी है कि आखिर ये जब कहाँ से आती है जिसमें इंसान जानवर से भी नीचे गिरकर न बन जाता है ?

वाहन ओवरटेक के मामले को जोड़ दिया “जयश्रीराम” कहने से.. रची जा रही भगवा आतंक से भी गहरी साजिश

ऐसी ही दुराचारी सोच का शिकार बिहार के सुपौल की एक युवती हुई है जिसके साथ सरफराज और बबलू सैफी नामक हैवान दरिंदों ने अपहरण कर दो दिन तक बलात्कार किया. पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने दिए शिकायती आवेदन में बताया है कि पिछले 23 जून को लगभग 10 बजे दिन में गांव के ही मोहम्मद सादिक मियां के पुत्र मोहम्मद सरफराज एवं करीमन साफी के पुत्र मोहम्मद बबलू साफी ने मेरे मोबाइल पर फोन किया और कहा कि जल्दी जाओ, तुम्हारी मां मूंग के खेत में बेहोश हो गई है.

आपदा से निपटने में भारत को संसार का सबसे प्रमुख देश बनायेंगे- अमित शाह

पीड़िता ने बताया कि उनकी बात सुनकर मैं बदहवास-सी मूंग के खेत में अपनी मां को देखने जा रही थी कि इसी बीच कब्रिस्तान के नजदीक पहले से ही बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार दोनों युवकों मोहम्मद सरफराज तथा मोहम्मद बबलू साफी ने मुझे जबरन हथियार के बल पर बाइक पर बैठा लिया और मेरे मुंह को दुपट्टे से बांध दिया. पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि वहाँ से दोनों मुझे सुपौल की ओर ले गए और वहां एक कमरे में बंद कर दोनों ने दो दिन तक मेरे साथ बारी-बारी से सामूहिक दुष्कर्म किया और उस दौरान मुझे जान से मारने की धमकी देते रहे.

1 जुलाई: बलिदान दिवस बीरबल सिंह ढालिया.. कई लाठियां व 3 गोलियां लगने के बाद भी तब तक थामे रहे ध्वज जब तक थम नही गई सांसे

पीड़िता ने बताया कि इसके बाद दोनों उसे किसी दूसरे अनजान स्थान पर ले गये. दो दिन बाद 25 जून को  दोनों मुझे मधुबनी पंचायत के क्वार्टर चौक एनएच 57 पर छोड़कर फरार हो गये . वहां से मैं किसी तरह लक्ष्मीनिया पंचायत के बरोमतरा गांव अपने नानी के घर पंहुची और मैंने सारी घटना की जानकारी नानी को दी. मेरे ननिहाल पक्ष द्वारा मेरे पिता को इस घटना की सूचना दी गई. इस मामले में पुलिस की भी  लापरवाही सामने आई है. युवती के पिता ने बताया कि 24 जून को मैं अपने पुत्री के अपहरण हो जाने का लिखित आवेदन छातापुर थाना में दिया था, लेकिन थानाध्यक्ष द्वारा दो दिन तक अपहरण का मामला नहीं दर्ज किया.

हिन्दुओ के नरसंहार की धमकी देने वाले मुफ्ती को सेकुलरिज्म का प्रतीक बता कर गले लगा चुके हैं प्रसिद्ध हिन्दू संत परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज

उन्होंने बताया है कि जब 25 जून को मेरी पुत्री को अपहरणकर्ता द्वारा मुक्त किया गया तो 26 जून को मेरी पुत्री ने पुनः छातापुर थाने में लिखित आवेदन दिया. आवेदन देने के बाद थानाध्यक्ष ने गुरुवार की सुबह थाना आने को कहा. गुरुवार को जब मैं अपनी पुत्री के साथ  थाने पहुंचा तो वहां थानाध्यक्ष के इंतजार में हम घंटों बैठे रहे. थानाध्यक्ष राघव शरण से जब मुलाकात नहीं हुई तब डीएसपी बीरपुर से मोबाइल पर शिकायत दर्ज करायी. इसके बाद जब थानाघ्यक्ष पहुंचे तो उन्होंने आवेदन बदलने का दबाव बनाया. इसके साथ ही पीडिता के परिजनों ने बताया कि अपनी पुत्री को न्याय दिलाने के लिए वे परेशान हैं और मामले में छातापुर थाना के अलावा महिला थाना से लेकर डीएसपी बीरपुर तथा एसपी सुपौल से भी गुहार लगाई है.

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए हमें सहयोग करेंनीचे लिंक पर जाऐं

सुदर्शन न्यूज को आर्थिक सहयोग करने के लिए नीचे DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW