सीमा के सैनिको जैसे ही हालात में ड्यूटी देते हैं UP के चंदौली जिले में चकरघट्टा थाने के पुलिसकर्मी.. साबुन भी लेना है तो 30 किलोमीटर दूर जाइये


राष्ट्र की रक्षा करने के लिए दुर्गम हालातों में खड़े सैनिको को देख कर हमे गर्व होता है और उनके सम्मान में सर अपने आप झुक जाया करता है.. लेकिन अगर देश के आंतरिक हालातों पर गौर किया जाय तो कुछ जगहें ऐसी भी हैं जो सीमा के हालात जैसी ही विषम हैं और वहां भी तैनात है राष्ट्र और समाज की सुरक्षा के आंतरिक प्रहरी वर्दी पहन कर.. अफ़सोस की बात ये है कि 5 स्टार आदि भर में ही घूमने वाले कुछ कैमरे उन दुर्गम जगहों पर नहीं जा पाते हैं और उनकी गौरवगाथा आम जनमानस के आगे नहीं आ पाती है.. इसका सबसे बड़ा नुक्सान होता है कि कुछ लोगों के मन में बनी पुलिस की छवि वैसे की वैसे रहती है जो असल में नहीं है .

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विदित हो कि देश के अन्दर मौजूद उन तमाम चुनौतीपूर्ण जगहों में से एक है उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से लगते जिले चंदौली का थाना चकरघट्टा.. चंदौली वो जिला है जो नक्सलवाद के चरम समय में उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिलों में से एक रहा था लेकिन यहाँ के पुलिस बल ने अपने बलिदान से इसको आगे नहीं बढने दिया और दिन रात संघर्ष कर के ऐसा चक्र चलाया कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा नक्सलवाद वहीँ चंदौली में ही दम तोड़ गया.. आज वही चंदौली पुराने तमाम इतिहास को पीछे छोड़ कर विकास के पथ पर अग्रसर है लेकिन इसकी नींव में असल में पुलिसकर्मियों का बलिदान और त्याग है .

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लेकिन अब हमारा कर्तव्य है कि खुद की रक्षा करने वाले उन वर्दीवालों की सुख सुविधाओं का ध्यान रखना.. वर्दी पहनने के बाद से ही सुख और सुविधा अक्सर एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस वाले के लिए प्राथमिकता नहीं रह जाती है.. इसको सच में अगर देखना हो तो सबसे बेहतर उदहारण है चंदौली जिले का थाना चकरघट्टा थाना .. ये थाना चंदौली मुख्यालय से लगभग 150 किलोमीटर दूर सोनभद्र जिले की सीमा पर मौजूद है .. ये थाना चंदौली के नौगढ़ प्रखंड में आता है जो अपेक्षाकृत अन्य प्रखंडो से काफी पिछड़ा हुआ है . अगर भौगोलिक स्थिति की बात करें तो ये थाना घने जंगलों के एकदम बीचो बीच में है ..

इस थाने तक जाने के लिए एक टूटी फूटी सडक है जिस पर वाहन चलना तो दूर पैदल जाने में भी असुविधा होती है . आस पास जंगली जानवर कभी भी कहीं भी मिल सकते हैं . चारो तरफ से पहाड़ियां हैं जो दुश्मन के लिए छिप कर वार करने की जगह भी बन सकती है… इस थाने के अंतर्गत लगभग 70 गाँव आते हैं जिसमे शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी यहाँ पर मौजूद लगभग 37 जांबाज़ और सच्चे कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मियों के कन्धो पर है. शिक्षा और आर्थिक अनुपात के हिसाब से भी ये सभी गाँव बाकी अन्य प्रखंडो से काफी पीछे हैं जिसमें कानून व्यवस्था का नियंत्रण रखना चकरघट्टा थाने की पुलिस के जिम्मे होता है .

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सुदर्शन न्यूज ने ऐसे हालातों में कार्य कर रहे पुलिस के जवानो के वीरतापूर्ण जीवन को दुनिया के आगे लाने का फैसला किया और हमारे चंदौली जनपद के संवाददाता प्रशांत सिंह ने उन घने जंगलों में जाने का फैसला किया जहाँ शहरों की चकाचौंध दिखाने वाले कैमरे शायद ही कभी गये रहे हों . हमारे संवाददाता प्रशांत सिंह ने जो कुछ देखा , समझा और अपनी रिपोर्ट के माध्यम से बताया वो यहाँ पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए किसी को भी सैल्यूट करने पर मजबूर कर देगा . ये जगह ऐसी है जो आपको असम या नागालैंड होने का आभास करवाएगी और बताएगी कि पुलिस की सिर्फ एकतरफा निंदा करना कितना आसान है और उनके कार्यों के बारे में सच जानना या उनका जीवन जीना कितना मश्किल भरा काम .

अपनी रिपोर्ट में चंदौली जनपद संवाददाता प्रशांत सिंह जी ने बताया कि चंदौली जनपद में नवागत जिलाधिकारी नवनीत चहल और वर्तमान पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह के आने के बाद अभूतपूर्व बदलाव और विकास हुआ है . अब हर तरफ सडक, स्कूल, अस्पताल आदि की मौजूदगी देखी जा सकती है और पुलिस उन्ही सडको पर गश्त करती हुई समाज को शांति और सुरक्षा का आश्वासन दिलाती हुई भी .. लेकिन कही न कही शासन को चकरघट्टा जैसे स्थानों की तरफ भी देखना ही होगा अगर कोई देश के कोने कोने में विकास करने का दावा और वादा करता है .. यद्दपि ये जिम्मेदारी मीडिया के उन वर्ग  की भी है जो ऑफ़ ड्यूटी एक सोते हुए सिपाही की फोटो वायरल कर के खुद को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ समझने लगते हैं .

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सुदर्शन न्यूज की टीम जब उन घने जंगलों में बने थाने चकरघट्टा में गई तो वहां पाया कि नौगढ़ से निकलने के बाद जंगली इलाको में घुसने के साथ साथ मोबाइल के नेटवर्क भी धीरे धीरे कमजोर होने लगे .. जब टीम थाने पर पहुची तो पाया कि अपनी जगह बार बार बदलने से कभी कभी मोबाइल में नेटवर्क आने लगा जो कभी भी छोड़ भी देता था . सुदर्शन न्यूज टीम के साथ लगभग सभी कंपनियों के मोबाइल थे जिसमे अधिकतर के नेटवर्क ध्वस्त ही पाए गये .. अगर अगर ऐसे हालात में पुलिस कर्मियों को अतिरिक्त फ़ोर्स की जरूरत पड़ जाए तो उसको बुलाने के लिए उनके पास शायद कोई माध्यम न हो ..

यहाँ तक कि ऐसे दुर्गम इलाके में तैनात पुलिसकर्मियों को अपने घर और परिवार में बात करने के लिए भी तरसना पड़ता है . सुदर्शन न्यूज की टीम ने वहां पाया कि थाने से दूर दूर कोई गाँव , कोई इंसानी बस्ती नही दिखी .. दिखाई दिए तो सिर्फ चारों तरफ पहाड़ और पेड़ .. कोई ऐसी किराना आदि की दूकान भी नहीं जहाँ से वो पुलिसकर्मी अपनी रोजमर्रा की जरूरते जैसे साबुन तेल या कुछ अन्य भी खरीद सकें . यहाँ ३ महिला सिपाही भी तैनात हैं जिनके ऐसे हालातों में संघर्ष की कोई कल्पना ही कर सकता है . अगर साबुन और तेल भी खरीदना है तो कम से कम 30 किलोमीटर दूर उन सभी को नौगढ़ बाज़ार आना पड़ता है .

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आगे बताया गया कि अगर पुलिस के वाहन में कोई खराबी आ गयी तो उसको बनवाने के लिए उनके पास कोई रास्ता नहीं है . बड़ी खराबी तो दूर अगर उन पथरीले और टूटे फूटे रास्ते पर पुलिस का कोई वाहन पंचर भी हो जाए तो उसको बनवाने के लिए पुलिसकर्मी को 30 किलोमीटर दूर नौगढ़ जाना पड़ता है .. क्या ये 30 किलोमीटर कोई पुलिस वाला जंगली जानवरों से भरे इलाके में वाहन खींच कर ले जाएगा ? और अगर रास्ते में घात लगा कर कोई अपराध या नक्सली बैठा हो तो उन पुलिसकर्मियों का क्या होगा ? क्या इतनी सस्ती जिन्दगी होनी चाहिए एक पुलिसवाले की जिसके ऊपर घर के झगड़े से ले कर आतंकी हरकतों तक को सम्भालने की जिम्मेदारी होती है .?

सुदर्शन न्यूज की टीम ने पाया कि नौगढ़ तहसील से चलने के बाद थाने तक उन्हें पीने के लिए पानी का एक स्रोत भी नहीं दिखाई दिया .. एक प्यासा इंसान अगर 30 किलोमीटर लम्बे रास्ते में फंस गया तो उसकी जान लेने के लिए प्यास ही काफी होगी . थाने में भी हालात बेहतर नहीं हैं . थाने के अन्दर जो दिखा वो और भी भयावह है .. थाने के अन्दर पानी के एकमात्र स्रोत के रूप में 1 सबमर्सिबल है जो बिजली से चलता है .. अगर किसी कारणवश बिजली कट जाए या सबमर्सिबल खराब हो जाए तो थाने में तैनात पुलिस्कर्मियो के पीने के लिए पानी तक नहीं बचेगा जो अक्सर होता भी रहता है .. क्या उस थाने में हैंडपंप तक नहीं लगाया जा सकता है जिसके कंधो पर 70 गाँवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गयी है  ? क्या एक पुलिसकर्मी आतंक , अपराध के साथ साथ प्यास से भी लड़ता है , कम से कम चकरघट्टा थाने के हालात तो यही बताते हैं .

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किसी सूचना पर एक गाँव से दूसरे गाँव जाने के लिए जंगलो का मार्ग अपनाना पड़ता है .. इन मार्गो पर सडक आदि नहीं है . कई कई बार इन पुलिसकर्मियों को काफी दूर पैदल आदि भी चलना पड़ता है जो रास्ते पथरीले और कंटीले हैं.. इन मार्गो पर जहरीले सांप आदि भी मिलना आम बात है . इसी थाने में रात होते ही मच्छरों का प्रकोप उस थाने में बढ़ जाता है . दिन भर कंटीले और पथरीले रास्तों पर पैदल चला पुलिसकर्मी रात में सोता कैसे होगा ये आपके विचार का विषय है . इस थाने की बाऊंड्री की दीवारों पर अभी तार या जाली नहीं लगाए गये हैं जिस से रात या दिन में कोई भी इसको कूद कर थाने में घुस सकता है . सुरक्षा करने वालों की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है ये हैरान कर देने वाला विषय है, ख़ास कर तब जब थाने में हथियार आदि मौजूद हों और नक्सलियों ने कई बार पुलिसकर्मियों पर ही हमला कर के हथियार आदि लूटे हैं ..

इतने के बाद भी सुदर्शन न्यूज की टीम के वहां जाने के बाद किसी भी पुलिसकर्मी ने किसी भी प्रकार की कोई भी शिकायत नहीं की और वो सभी तन्मयता के साथ अपने अपने कामो में व्यस्त दिखाई दिए.. उन सभी को अपनी वर्दी , अपने कार्यों में तन्मय देख कर ये समझ में आया कि कर्तव्यनिष्ठा क्या होती है . उन्होंने वहां पहुचे मीडियाकर्मियो का यथोचित सम्मान और स्वागत किया जो किसी कोई भी अविभूत कर देने के लिए काफी था . ये सभी शब्द , ये वो हालात हैं जो मात्र 1 दिन वहाँ बिताने के बाद सुदर्शन न्यूज संवाददाता ने खुद से देखे और खुद के ऊपर रख कर समझे ..

अब जरा कल्पना कीजिए वहां पर तैनात पुलिस वालों के बारे में जो वही रहते हैं और हर दिन, हर पल ऐसे स्थितियों का सामना करते हैं .  यद्दपि भौगोलिक हालातों को बदलना किसी के लिए भी सम्भव नहीं है लेकिन क्या मोबाईल का नेटवर्क , पानी की उपलब्धता के लिए हैन्डपम्प , वाहन आदि को बनाने के उपकरण और कारीगर , बाऊंड्री वाल के तार , रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की उपलब्धता आदि ऐसी चीजें हैं जिस पर बहाना नहीं बनाया जा सकता है .  सवाल उन नेताओं से भी जो पुलिस की गलती को सरकार के खिलाफ मुद्दा और मोर्चा बनाते हैं , क्या ऐसे हालातों में समाज की रक्षा करते पुलिसकर्मी उनके लिए उठाने लायक आवाज या मुद्दा नहीं हैं ?

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**यदि आपकी भी जानकारी में ऐसी कोई और जगह है तो हमें जरूर बताएं ..

लेखक –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

नॉएडा , उत्तर प्रदेश 

मोबाइल – 9598805228 

 

 

 


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