पति थे नक्सली, अब बीवियों ने पहनी वर्दी.. नारी शक्ति की वो प्रतीक जिन्हें जान कर गर्व होगा आपको

एक समय था जब उनके पति नक्सली थे तथा वो खुद लाल सलाम बोलकर अपने ही देश के खिलाफ हथियार उठा चुकी थी. लेकिन सुरक्षाबलों के तमाम प्रयासों के बाद अब ये हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुकी है. बदलाव इतना आया है कि नारी शक्ति की इन प्रतीकों को आप नमन कर उठेंगे. एक समय इन्होने अपने ही देश के खिलाफ हथियार उठाया था तो अब ये उसी “लाल आतंक” के खात्मे के लिए हथियार उठा चुकी हैं.

आखिर भगवान गणेश क्यों विराजमान हैं संसार के सबसे बड़े इस्लामिक मुल्क की मुद्रा पर ? जानिए और सबको बताइये

हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ में AK-47 लेकर नक्सलियों के खिलाफ जंग में आगे के मोर्चे पर खड़ी “दंतेश्वरी फाइटर्स” की महिला कमांडोज का. इन महिला कमांडोंज को छत्तीसगढ़ की संरक्षक देवी के नाम पर “दंतेश्वरी फाइटर्स” नाम दिया गया है. इन कमांडो ने बुधवार को हुए नक्सलियों के खिलाफ एक ऑपरेशन में हिस्सा लिया और 2 नक्सली ढेर किए हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक इन महिला कमांडों ने एक महीने में 5 नक्सलियों को ढेर किया है.

इस्लामिक मुल्क अफगानिस्तान में गोलियों से भून डाली गई महिला पत्रकार. उनके काम को घोषित किया गया था “नाकाबिले बर्दाश्त”

बता दें कि दंतेश्वरी फाइटर्स महिला और पुरुष कमांडोज का समूह है, जो जंगल में रहने और लड़ने में पारंगत हैं. यह प्रयोग दंतेवाड़ा जिले के एस. पी. अभिषेक पल्लव के दिमाग की उपज है. जानकारी के मुताबिक 4 महीने पहले जब अभिषेक पल्लव आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के एक कैंप का दौरा करने गए थे, उस वक्त उनके दिमाग में महिला कमांडों बनाने का विचार आया तथा फिर उन्होंने इसे लागू किया जो सफल होता हुआ नजर आ रहा है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘एक तरफ जहां ज्यादा पूर्व पुरुष नक्सलियों को प्रशिक्षित करने के बाद उन्हें डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड में भर्ती कर लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ महिलाएं घरों में बैठकर रोटी बना रही थी. इसकी वजह से वे कुंठा की शिकार हो रही थी. क्योंकि वे जंगल में पुरुषों के साथ बराबरी से रहा करती थीं. लेकिन अब वे पुरुषों की सेवा कर रही हैं. इससे उनके अंदर कमजोर और कमतरी का अहसास होता था.’ इसके बाद पल्लव ने डिस्ट्रिक्ट एस.पी. दिनेश्वरी नंदा से ‘महिला कमांडोज की एक एकीकृत कॉम्बैट फोर्स’ बनाने के लिए कहा. फिर 30 महिलाओं को चुना गया और उन्हें ब्रिगेडियर बी. के. पोंवार (रिटायर्ड) द्वारा संचालित कांकेर जंगल वॉरफेयर कॉलेज भेजा गया.

जब तक देश में छिपे अंतिम आतंकी को खत्म नहीं कर लेता, इस्तीफा नहीं दूंगा- मैत्रिपाला सिरिसेना, राष्ट्रपति श्रीलंका

यहां उन्हें दिसंबर में उन्हें 6 हफ्तों की कड़ी कॉम्बैट ट्रेनिंग दी गई. इसके बाद मार्च तक सभी 30 महिलाओं को इन-हाउस ट्रेनिंग दी गई. पहले तो उन्हें छोटे ऑपरेशनों में भेजा गया, लेकिन अब वे बड़े ऑपरेशंस के लिए पूरी तरह तैयार हैं. दंतेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव के मुताबिक इससे और ज्यादा महिला नक्सलियों को सरेंडर करने की प्रेरणा मिलेगी. महिला कमांडोज कुछ मायनों में पर्फेक्ट हैं. वे अपने हथियारों को अपनी साड़ियों में छिपा सकती हैं और किसी को कोई शक हुए बिना ही नक्सलियों पर नजर रख सकती हैं. इतना ही नहीं, वे भीड़ में आसानी से घुल जाती हैं. ये महिला कमांडोज लाल आतंक के खात्मे में काफी अहम् भूमिका निभा रही हैं.

इधर देश चुन रहा भारत भाग्य विधाता उधर सेना ने कश्मीर में खामोश किया लश्कर के 2 दुर्दांत इस्लामिक आतंकियों को

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने व हमें मज़बूत करने के लिए आर्थिक सहयोग करें।

Paytm – 9540115511

Share This Post