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भारत का सबसे सेकुलर गाँव जहाँ एक भी मुसलमान नहीं फिर भी एक मस्जिद को 200 साल से सहेज कर रखा है हिन्दुओ ने. वहां हिन्दू ही देते हैं अज़ान

भले ही एक पक्ष अदालत में हर प्रकार से संघर्ष कर रहा हो हिन्दू समाज के आराध्य भगवान श्रीराम का मन्दिर न बनने देने के लिए . भले ही आतंकी वर्ग कभी अयोध्या , कभी मथुरा तो कभी काशी में आतंकी हमले कर के हिन्दुओ की आस्था को लगातार चुनौती देते आये हों , भले ही कुछ उन्मादी फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर आये दिन हिन्दुओ के देवी देवताओं को अपमानित करते हों. भले ही हैदराबाद का दंगाई ओवैसी 15 मिनट की बात आये दिन किया करता हो ..

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लेकिन हिन्दू समाज की जडो तक सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्षता इस कदर समाई हुई है कि वो एक ऐसे गाँव में भी एक मस्जिद 200 सालों से सम्भाल कर रखा है जहाँ एक भी मुसलमान नहीं हैं . सबसे ख़ास बात ये है कि भले ही वहां के हिन्दू अपने घर की साफ़ सफाई एक बार भूल जाएँ पर मस्जिद की साफ़ सफाई और रंग रोशन वो लगातार ध्यान में रख कर करते हैं . इस से भी बड़ी बात ये है कि वहां के हिन्दू मस्जिद में बराबर अज़ान भी किया करते हैं जिसको पूरा गाँव बड़े ध्यान से भक्तिभाव से सुनता हैं .

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भारत के सबसे बड़े सेक्युलर गाँव कहे जा सकने वाला गाँव बिहार में है.. इसका जिला नालंदा है . यहाँ किसी हिन्दू के घर अगर शादी ब्याह पड़ता है या कोई भी शुभ काम आता है तो वो इसी मस्जिद के दर्शन करने जाता है . मस्जिद के बाहर की मजार पर भी लोग चादरपोशी करते हैं। नाना बदरे आलम ने कराई थी मस्जिद की तामीर बिहारशरीफ के खालिद आलम भुट्टो बताते हैं कि उस मस्जिद की तामीर (मरम्मत) उनके नाना बदरे आलम ने करीब दो सौ साल पहले कराई थी।

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बिहार नालंदा के बेन प्रखंड के माड़ी गांव में एक भी घर में मुस्लिम नहीं हैं लेकिन हर दिन पांचों वक्त की अजान होती है। हिंदू समुदाय के लोगों को अजान तेनी नहीं आती तो पेन ड्राइव की मदद लेते हैं। साल 1941-42 में सांप्रदायिक झगड़े हुए जिसके बाद मुस्लिम यहां से बाहर चले गए लेकिन परंपरा आज भी जारी है। लोगों का मानना है कि पहले वहां से बुजुर्ग हजरत इस्माइल गुजर रहे थे। वे वहां रुके और उनका देहांत हो गया. उन्ही की याद में वो मस्जिद बना दी गई है जो आज वहाँ के हिन्दुओ की आस्था का प्रमुख केंद्र है .

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