क्या उचित है बलरामपुर SP देवरंजन वर्मा का विरोध जिन्होंने कोशिश की है पुलिसकर्मियों को अंग्रेजी सिखाने की ?

उत्तर प्रदेश पुलिस में पिछले कुछ दिनों से जिस चीज की सबसे ज्यादा चर्चा है , वो है पुलिस अधीक्षक बलरामपुर द्वारा अपने अधिनस्थो को एक आदेश जारी करना जिसमे उन्होंने छुट्टी आदि के आवेदन अंग्रेजी भाषा में लिख कर देने का आदेश दिया है . ये आदेश न ही उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय से है और न ही केंद्र सरकार आदि की तरह से उठाया गया कोई कदम .. ये आदेश जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक देवरंजन वर्मा का है जिसकी सीमायें मात्र बलरामपुर तक में सीमित हैं .

अचानक ही इस खबर के आने के बाद इसको अपनी भाषा में परिभाषित करने की तमाम कोशिशें शुरू कर दी गईं.. किसी ने इसको पुलिस अधीक्षक बलरामपुर की तानाशाही करार दे दिया तो किसी ने इसको सिपाहियों और सब इंस्पेक्टरों पर लादा गया एक और बोझ बताना शुरू कर दिया.. कुछ तो इस से भी आगे बढ़ गए और उन्होंने पुलिस अधीक्षक बलरामपुर के इस आदेश को भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हिंदी को बढ़ावा देने के प्रयासों को एक झटका जैसा गिना डाला..

लेकिन जब सुदर्शन न्यूज ने इस आदेश का गहराई से अध्ययन किया तो सच और तथ्य कुछ और ही निकल कर सामने आये.. गहनता से अध्ययन करने पर ये पता चला की इस आदेश का एक और सिर्फ एकमात्र उद्देश्य अपने जिले की पुलिस को हाईटेक बनाना है.. कई पुलिस वालों को ही अक्सर समस्या होती है कि उनके तौर तरीके काफी पुराने हैं और अंग्रेजो के जमाने आदि के क़ानून से उन्हें संचालित किया जा रहा है लेकिन जब उन्हें आधुनिक करने का प्रयास शुरू होता है तो इसी प्रकार से विरोध के स्वर उठने लगते हैं .

सबसे ख़ास बात ये है कि खबरिया विरोध में किसी भी पुलिस वाले ने अपना विरोध दर्ज नहीं करवाया है बल्कि ये विरोध मात्र पुलिस विरोध को ही अपनी खबरों का आधार मानने वाले कुछ गिने चुने लोगों द्वारा किया जा रहा है..इस मामले को और भी जायदा बारीकी से समझना है तो ये जाना जा सकता है की सेना या अर्द्धसैनिक बलों में जिनकी पोस्टिंग सीमाओं पर होती है उन्हें पडोसी देशो की भाषा का ज्ञान करवाया जाता है जिस से उनके सैनिक आपस में क्या बात कर रहे हैं, उसे जानने में आसानी हो .

अभी हाल में ही चीन सीमा पर तैनात भारतीय सैनिको को चीनी भाषा सिखाने की खबर आई थी जिस पर किसी ने विरोध नहीं किया . अगर विरोध किया भी जाता तो वो आधारहीन ही कहा जाता क्योकि शत्रु की हरकत के हर दांव पेंच पर नजर रखना ये एक अच्छे और सच्चे योद्धा की निशानी होती है.. आज कल के हाईटेक समय में फोन से ले कर व्हाट्सएप और फेसबुक पर किये जाने वाले साइबर अपराधो में हाईटेक अपराधी ज्यादातर अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हैं .. ऐसे में उस पुलिस वाले से क्या आशा की जाय जिसके लिए अंग्रेजी नई चीज हो..

इसके अलावा बैंक फ्राड जैसे मामलो में सबसे ज्यादा अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता है जिसके लिए विवेचक अक्सर किसी अंग्रेजी में एक्सपर्ट की मदद लेता है, कई सिपाहियों आदि के लिए तो वो सर के ऊपर से गुजरने वाली बात होती है.. ऐसे में ये एक प्रयास है समय के साथ हाईटेक हो रहे अपराध को हाईटेक ढंग से रोकने का जिसका विरोध नहीं बल्कि स्वागत ही होना चाहिए पर न जाने क्यों पुलिस की अंध विरोध करने की मानसिकता कईयों में घर जैसी कर गई है..

इसी के साथ एक तथ्य और है की आज बलरामपुर में तैनात सिपाही सम्भवतः कल वाराणसी , झांसी , मथुरा , आगरा जैसे किसी विदेश पर्यटक आवगमन क्षेत्र में तैनात हो.. वहां अक्सर सैलानियों का पर्स चोरी होना, उनके साथ दुर्व्यवहार होना जैसे अपराध सामने आते हैं . ऐसे में उस पुलिसकर्मी के पास विदेशियों द्वारा दिया गया प्रार्थना पत्र अक्सर अंग्रेजी भाषा में होता है.. अनुमान लगाइए की अंग्रेजी भाषा को न समझ न लिख पाने वाला पुलिसकर्मी ऐसे पीड़ित विदेशियो की क्या मदद कर पायेगा.

अनुमान लगाने योग्य है की अगर अंग्रेजी न समझने वाला पुलिसकर्मी अगर दुनिया भर से आये विदेशियो की मदद नहीं कर पायेगा तो पूरी दुनिया भर में भारत की क्या छवि जाएगी ? क्या अब तक गरीब भारत की फर्जी फोटो खींच कर विदेशो में बांटने वाले कुछ लोग अशिक्षित पुलिस की अफवाह नही उड़ायेंगे ? या ऐसे किसी बेइज्जती के बाद अगर शासन का आदेश आया होता तो भी ऐसा ही विरोध शासन का भी होता जैसा की बलरामपुर SP का किया जा रहा है .

बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक देवरंजन वर्मा अपनी न्यायप्रिय और निष्कलंक छवि के लिए पुलिस विभाग में एक आदर्श अधिकारी के रूप मे गिने जाते हैं .. सम्भवतः उनका एक भी कदम ऐसा नहीं उठा है उनके पुलिस कैरियर में जो किसी अधीनस्थ को व्यक्तिगत रूप से हानि पहुचाने से प्रेरति हो.. ऐसे में अगर एक खास मीडिया के शोर में उन्हें अपना कदम वापस भी खींचना पड़ा तो इसमें नुकसान IPS देवरंजन वर्मा का नहीं बल्कि उन पुलिस वालों का होगा जिन्हें हाईटेक करने का अभियान देवरंजन जी ने छेड़ा था..

सबसे ख़ास बात ये भी है की पुलिस के कार्यों की विवेचना उनके द्वारा ज्यादा की जाती है जो उस विभाग से नहीं होते.. जवान का काम जवान को और किसान का काम किसान को ही सौंपा जाय तो शायद बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे ..अक्सर कई नौकरियों आदि में “अंग्रेजी भाषा का ज्ञान अनिवार्य” जैसे कालम होते हैं तो इसका मतलब ये नहीं की वो नौकरी राष्ट्रवाद नहीं सिखाती बल्कि समय के अनुसार कुछ बुनियादी जरूरतें होती हैं जिसके चलते ये कदम उठाये जाते हैं .

यहाँ बिना किसी ठोस बुनियाद के इस मामले में अंधविरोध करने वालों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए की बलरामपुर SP ने अंग्रेजी में प्रार्थना पत्र देने के साथ ऐसा कोई नियम नहीं लगाया है की जिसकी स्पेलिंग गलत होगी उसको सजा मिलेगी या जिसका पैराग्राफ सही नहीं होगा उसको अवकाश नहीं मिलेगा .. ये मात्र एक प्रयास है उस समय के साथ अपने अधिनस्थो को हाईटेक बनाने का जिसमे आज कल के ज्यादातर युवा कान्वेंट स्कूलों से पढ़ कर निकल रहे हैं..

 

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय – नोएडा 

सम्पर्क – 9598805228


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