बुर्के में आई थी निशत फातिमा डिग्री लेने.. बुर्का उतारने को बोला गया तो अड़ गईं .. फिर फैसला कालेज को लेना था और लिया भी गया

अभी कुछ समय पहले ही उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के इस कालेज ने अपनी आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कालेज परिसर में बुरका बैन कर दिया था . उस समय नकाब आदि में मारपीट आदि की कई घटनाएँ ऐसी हुई थी जो कालेज के छात्र छात्राओं का ध्यान पढाई के बजाय डर जैसे माहौल में धकेल रही थी.. उसके बाद उस फैसले का जहाँ कालेज के स्टाफ , वहां के छात्र छात्राओं ने ही नहीं बल्कि आम जनमानस ने सराहना की थी बल्कि उसके आने वाले समय की एक झलक बताया गया था .

उसके बाद दारुल उलूम देवबंद ने उस फैसले को गलत बताया था.. इसके बाद अब एक और घटना हुई है झारखंड में . यहाँ ये ध्यान रखना होगा कि झारखंड आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील है क्योकि यहाँ आये दिन नक्सली घटना पूरे भारत में चिंता का विषय कभी बना करती थी . यद्दपि यहाँ की पुलिस , CRPF आदि ने मिल कर अपने बलिदान से नक्सलवाद को काफी हद तक काबू किया था लेकिन सतर्कता रखती जरूरी थी और वो रखा भी गया …

विदित हो कि सतर्कता के उच्चतम स्तर पर रहने वाले झारखंड में एक महिला को बुरका पहने हुए होने की वजह से कालेज के समारोह में डिग्री नहीं दी गई . जहाँ तमाम मुस्लिम समूह इस फैसले को गलत बता रहे हैं तो वहीँ आम जनमानस इसकी सराहना भी कर रहा है और ऐसा ही पूरे देश में लागू करने की मांग कर रहा है.. रांची के मारवाड़ी कॉलेज के दिक्षांत समारोह में डिग्री लेने आई कॉलजे की ओवर ऑल बेस्ट ग्रेजुएट निशत फातिमा को समारोह में डिग्री नहीं दी गई।

खबर के अनुसार निशत फातिमा इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुर्का पहन कर आयी थी। समारोह में मेडल के लिए उसका नाम पुकारा गया। उसे सबसे पहले मेडल  लेना था लेकिन नाम बुलाने के साथ ही मंच से ही इसकी घोषणा कर दी गयी कि वह कॉलेज द्वारा तय ड्रेस कोड में नहीं है, इस कारण उसे समारोह में डिग्री नहीं दी जायेगी। कॉलेज के दौरान भी वह बुर्का पहन कर क्लास करती थी। उसे बुर्का हटाकर कार्यक्रम मे भाग लेना स्वीकार नहीं हैं।


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