योगी आदित्यनाथ को अपमानित करने का अधिकार मांगने अदालत गया था उन्मादी इफ्तेखार अहमद … जानिये क्या मिला जवाब

समाज में फ़ैल रहे एकपक्षीय मजहबी उन्माद का इस से बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि एक मुख्यमंत्री के खिलाफ पहले तो जहर उगला जाय , फिर उस जहर को सही साबित करने के लिए और उनको अपमानित करने की एक प्रकार से अनुमति मांगने के लिए अदालत की शरण तक में जाया जाय और तब भी बात न बने तो सीधे सीधे नाबालिग बच्चो को आगे कर दिया जाय .. न सिर्फ साम्प्रदायिक जहर बल्कि साजिश की चरमसीमा भी है ये .

ये वही लोग हैं जो अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर देश विरोधी नारे लगाते थे और समाज को खंडित करने का प्रयास करते थे . ये घटना उत्तर प्रदेश के देवरिया की है और इस पूरी साजिश का सूत्रधार है इफ़्तेख़ार खान जिसके मन में भरा है योगी , भगवा और हिन्दू के खिलाफ अथाह जहर . वो उन्मादी भी है और शातिर भी क्योकि उसने इस पोस्ट को करने से पहले ही अपने बचाव के सभी मुद्दों पर विचार कर रखा था और उसको आजमाया भी ..

लेकिन सरहना की पात्र है देवरिया की पुलिस जिसने अंतिम समय तक पीछा नहीं छोड़ा उसका जो एक राज्य के मुख्यमंत्री और एक मन्दिर के महंथ के खिलाफ ऐसी दुर्भावना रखता था जो कानून अपराध की श्रेणी में थी . ध्यान देने योग्य है कि इफ्तेकर खान ने अपने फेसबुक पर आपत्तिजनक रूप से लिखा था कि ‘वाणी संतुलन के लिए होम्योपैथिक दवा’ जिस पर उसने योगी आदित्यनाथ की आपत्तिजनक फोटो का दुरूपयोग किया था .. इसी पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी क्योकि इसका समाज में व्यापक विरोध हुआ था . यद्दपि अपनी गलती मानने के बजाय इफ़्तेख़ार सीधे कानूनी कार्यवाही के बदले कानूनी कार्यवाही पर उतारू हो गया .

विदित हो कि हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट डालने वाले देवरिया के भाटपार रानी निवासी इफ्तेखार अहमद के विरुद्ध एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया फेसबुक पोस्ट धार्मिक भावना भड़काने वाली लगती है, जिससे कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।

असल में कोर्ट में इफ़्तेख़ार अहमद ने कहा था कि आपत्तिजनक पोस्ट उसने नहीं की है, उसके फोन पर आई पोस्ट को अनजाने में उसके नाबालिग बेटे ने फारवर्ड कर दिया है। जबकि इसका मतलब ये भी निकलता है कि वो योगी विरोध में अपनी औलाद को अपने बचाव में बलि का बकरा बनाने के लिए तैयार है और सवाल ये भी उठता है कि एक नाबालिग आख़िरकार कैसे योगी के खिलाफ इतना जहर रख सकता है और किस ने उसको ये सब सिखाया था .. इसी मुद्दे पर उत्तर प्रदेश राज्य सरकार का पक्ष था कि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री धर्मगुरु भी हैं और पहनावा भी मंदिर के पुजारी का है। यह पहनावा हिन्दू धर्म के संतों द्वारा पहना जाता है। इस पोस्ट से धार्मिक भावना को भड़काने की कोशिश की गई है, जिसे भारी संख्या में लोगों ने देखा होगा।

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