जहाँ मुख्यमंत्री का सम्मान नहीं सुरक्षित वहां कार्यकर्ताओं की जान कैसे बचे ? गाजियाबाद में भाजपा नेता की हत्या से पहले खूब बढाये गये थे ऐसे अपराधियों के मनोबल

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है , इस सरकार में विपक्ष सत्ता पक्ष के नेताओं पर सरकारी मशीनरी के दुरूपयोग का लगातार आरोप लगाता रहा है लेकिन जब इसकी तह में जा कर हकीकत को देखा जाय तो ऐसा सच निकल कर सामने आता है जो किसी के लिए भी विश्वास करने योग्य नहीं होगा.. राजधानी दिल्ली से सटे NCR क्षेत्र में आने वाले गाजियाबाद में खुद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की जान खतरे में है और उसकी पहली जिम्मेदारी अगर किसी पर है तो वो है पुलिस प्रशासन की .

गाज़ियाबाद के मसूरी थानाक्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और डासना मंडल अध्यक्ष डॉ. बीएस तोमर की 20 जुलाई की रात को गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई ..मसूरी के दूधिया पीपल में 20 जुलाई की रात नौ बजे अपना क्लीनिक बंद कर सामने वाले खोके पर सिगरेट पीने के लिए खड़े बीएस तोमर को स्कूटी सवार हमलावरों ने गोलियों से भून दिया था। उनके सिर व पीठ में दो और पसलियों में एक गोली मारी गई थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

हत्या करने के बाद कत्ल के आरोपित स्कूटी छोड़ फरार हो गए थे, जो डासना के शाहरुख की थी. भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह, जो परिवहन मंत्री भी हैं, ने बुधवार को तोमर के परिवार से मुलाकात की और राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपये और पार्टी फंड से पांच लाख रुपये दिए.. सत्ता पक्ष के नेता को दुस्साहसिक रूप से मारना तो दूर उसका विचार भी लाना रोंगटे खड़ा कर देता है लेकिन जब पुलिस प्रशासन का इतिहास खंगाला जाय तो ऐसी घटनाओं की जड़ उनके द्वारा दिया गया मनोबल ही सामने  आएगा..

गाजियाबाद पुलिस में भले ही वर्तमान पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह नए हैं और उन्हें निश्चित तौर पर हालत को समझने का पूरा अवसर नहीं मिला पर बाकी सभी स्टाफ पुराने हैं जिन्होंने कभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पर अभद्र टिपण्णी करनी वाली महिला तक के आगे घुटने टेक दिए थे.. जिस जिले में मुख्यमंत्री तक को अपमानित करने की खुली छूट हो उस जिले में भाजपा के सामान्य नेताओं के जान और माल की रक्षा कैसे होती होगी ये खुद मुख्यमंत्री को विचार करना होगा ..

क्या आप कल्पना कर सकते हैं एक ऐसे संदिग्ध या वांछित की जिसके ऊपर आधे दर्जन के आस पास मुकदमे हों और उसके बाद भी वो अधिकारियो के साथ अपनी फोटो पोस्ट करते हुए सोशल मीडिया पर लाइव दिखाई दे.. वो तमाम जाली प्रमाण पत्रों से अपना वो पासपोर्ट बनवा ले जो किसी राष्ट्र की पहिचान का सबसे उच्चतम पहिचान पत्र माना जाता है .. इसके बाद भी पुलिस के हाथ उसके बगल तक जाने में किसी भय या दबाव के चलते काँप रहे हों तो सवाल बनेगा कि क्या जिला सुरक्षित है ?

उक्त महिला साहिबाबाद क्षेत्र की रहने वाली बताई जाती है जो सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक के खिलाफ संवेदनहीन और असभ्य लाइने लिखने के लिए चर्चा में रही है . जब एक लम्बे समय से गाजियाबाद पुलिस इसके ऊपर हाथ नहीं डाल पाई.. आधे दर्जन के आस पास मुकदमे में वांछित ये महिला लगातार सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही है जिसकी लोकेशन आदि की जानकारी फिर भी पुलिस को नहीं , इसमें हर किसी को शक है.. कैसे माना जाय कि आधे दर्जन मुकदमे में वांछित कोई अभियुक्ता हर दिन सोशल मीडिया पर लाइव आ रही या पोस्ट कर रही , फिर भी पुलिस को उसकी लोकेशन नहीं पता ..

अगर इतने के बाद भी वो ये नहीं पता कर सकती तो क्या उस से समाज की रक्षा की आशा की जा सकती है अगर कोई अपराधी इस अभियुक्ता से भी ज्यादा शातिर निकल आये तो ? निश्चित तौर पर गाजियाबाद के नए पुलिस प्रमुख को हत्यारों , लुटेरों और अन्य दुर्दांत अपराधियों से निबटने में जितना समय लगेगा उस से ज्यादा उन पुलिस वालों पर नजर रखने में भी लगेगा जिन्होंने डासना से ले कर साहिबाबाद तक कभी भाजपा नेता के हत्यारे और कभी योगी पर टिपण्णी करने वाले असामाजिक तत्वों को इतना बढावा दिया जिस से उन्होंने फर्जी पासपोर्ट तक बनवा डाले. फिलहाल आने वाले समय में कितनी भी कड़ी कार्यवाही करने के बाद भी आधे दर्जन मामलों में वांछित अभियुक्ता का फर्जी प्रमाण पत्रों पर पासपोर्ट बनवाने का दाग हमेशा गाजियाबाद पुलिस के माथे पर लगा रहेगा.. अंत में जहाँ मुख्यमंत्री का सम्मान सुरक्षित नहीं हो वहां उनके कार्यकर्ताओं की जान कैसे सुरक्षित होगी .. ये बड़ा सवाल बना रहेगा ..

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