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कोलकाता के IPS के साथ खड़ा हो गया पूरा विपक्ष, लेकिन लखनऊ के IPS के साथ कोई एक भी नहीं.. वो अकेला लड़ रहा भारत के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक के खिलाफ

अगर आप ने किसी फिल्म में तमाम बन्दिशो में बंधे एक पुलिस वाले और मुक्त स्वतंत्र नेता की जंग देखी हो तो उसमे जिस भी अभिनेता का रोल आपको दिखेगा उसका संघर्ष फिल्म में उस IPS अमिताभ ठाकुर से बहुत कम होगा जो असल जीवन में भारत के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक राजनेता से जूझ रहा है . न्याय की ये जंग तब भी जारी थी जब खुद उन्ही राजनेता के बेटे की सरकार थी भले ही इसके बदले उनको झेलनी पड़ी हो अंतहीन प्रताड़ना .

ज्ञात हो कि वर्दी का स्वभिमान किस को कहते हैं इसको कोई अमिताभ ठाकुर से सीख सकता है . योगीराज तक में आश्चर्यजनक रूप से पुलिस ने अमिताभ ठाकुर के तमाम दावों और सबूतों को दरकिनार करते ही जब पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को क्लीन चिट दे दी तो भी आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने हार नहीं मानी और उन्होंने अदालत की शरण ली . विदित हो कि उन्ही प्रयासों के चलते अब सीनियर आईपीस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को फोन पर धमकी देने के मामले में लखनऊ लखनऊ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है जो बन सकता है मुलायम सिंह यादव के लिए परेशानी का विषय .

10 जुलाई 2015 को आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी. पुलिस ने इस मामले में पहली बार अक्टूबर 2015 में अपनी रिपोर्ट लगाई थी, लेकिन ठाकुर ने इस पर सवाल उठाते हुए कोर्ट में इसे चुनौती दी थी. अदालत ने 20 अगस्त 2016 को पुलिस को मामले की जांच करने के आदेश दिए थे. इसके बाद पुलिस ने मुलायम की आवाज का नमूना लेने की कोशिश की थी, लेकिन मुलायम ने इससे इनकार कर दिया था. हालांकि बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि कॉल रिकॉर्डिंग में उन्हीं की आवाज है

मुलायम सिंह यादव को क्लीन चिट देने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को चीफ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने खारिज कर दी है. सीजेएम ने मामले पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश देते हुए अभियोजन पक्ष को 12 फरवरी को बयान दर्ज कराने को कहा है. सीजेएम लखनऊ आनंद प्रकाश सिंह ने अपने आदेश में कहा, “अमिताभ ठाकुर अपने बयान कर कायम हैं और उन्होंने अपनी शिकायत के पक्ष में सबूत पेश किये हैं. मुलायम सिंह ने भी अपने बयान में फोन रिकॉर्डिंग में अपनी आवाज का होना स्वीकार किया है.ऐसे में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट रद्द किये जाने योग्य है.” अमिताभ ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मुलायम के राजनीतिक रसूख को देखते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी. यहाँ भारत के उन तमाम राजनेताओं के दोहरे चरित्र भी उजागर हो रहे हैं जो कोलकाता पुलिस प्रमुख आईपीएस राजीव कुमार के लिए न्याय की गुहार सुप्रीम कोर्ट से एकजुट हो कर लगा रहे हैं लेकिन वहीँ लखनऊ में आईपीएस अमिताभ ठाकुर को न्याय की लड़ाई में अकेला छोड़ चुके हैं .

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