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प्रयागराज से भी ज्यादा लापरवाही है गाज़ियाबाद में..पासपोर्ट में फर्जी दस्तावेजों व खुद मुख्यमंत्री के अपमान पर ऐसी हरकत ?

भारत मे अगर किसी पहिचान पत्र को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है तो वो है पासपोर्ट.. ये वो प्रमाण पत्र है जिसका दुरुपयोग कर के न जाने कितने रोहिग्या व बंगलादेशी भारत मे अवैध रूप से बस गए और इसी का दुरुपयोग कर के न जाने कितने दुर्दांत अपराधी कानून की सीमा से बाहर दूर देशों में चले गए.. अबू सलेम जैसे टॉप मोस्ट अपराधियो ने पासपोर्ट का दुरुपयोग किया और उसके बाद जनता को मात्र हाथ मलने के और कोई विकल्प नहीं दिखता है.. लेकिन कोई है जिसको न तो इतिहास से फर्क पड़ता है और न ही वर्तमान से..और वो है गाजियाबाद का पुलिस प्रशासन..

विदित हो कि नवागत SSP सुधीर कुमार सिंह जी को जहां अपराधियो को जेल भेजने की चुनौती मिली है तो वहीं एक अदृश्य चुनौती और भी उसके साथ चल रही है और वो है अधीनस्थों को सुधारने की..  कल कवि नगर थाने में एक महिला की गिरफ्तारी की खबर ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था.. दीप्ति शर्मा नाम की ये महिला बुलंदशहर से ले कर गाजियाबाद और दिल्ली तक के तमाम थानों पर चर्चित थी और लगभग आधे दर्जन मुकदमो में वांछित चल रही थी जिसमें किसी पर हमला करवाना और आये दिन IPS अधिकारियों को झूठे मामले में फर्जी तथ्यों से परेशान करना प्रमुख था..

इसी महिला ने वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पर बेहद अश्लील और अभद्र टिप्पणी की थी लेकिन फिर भी इसको पूरा मौका दिया गया कभी फेसबुक ट्विटर पर लाइव आ कर डांस करने का, अदालत में जा कर अपनी पैरवी करने का और तमाम अन्य थानों में जा कर झूठे आरोप दर्ज करवाने का.. अगर मामला मुख्यमंत्री का हो तो कम से कम उस राज्य की पुलिस द्वारा तेजी की अपेक्षा तो होती ही है लेकिन जब निष्क्रियता अपने चरम पर होती है तो उस समय अपना खुद का ध्यान भी नही होता , मुख्यमंत्री की बात तो बहुत दूर होती है.. ये सब कुछ चला है कुछ दिन पहले गाजियाबाद पुलिस में..

इसी महिला के ऊपर एक व्यक्ति ने पासपोर्ट में फर्जी कागज होने का मुकदमा दर्ज करवाया था.. क्या ये कार्य किसी तीसरे व्यक्ति का था ? जबकि ये कार्य पुलिस का था फिर भी पुलिस ने इसमें रुचि नही ली..आखिरकार अदालत जा कर ये मामला दर्ज करवाया गया और अदालत के आदेश के बाद भी लगभग 2 माह में एक भी कदम आगे नही बढ़ पाई गाजियाबाद पुलिस.. आज 2 माह से इस आधे दर्जन मामले में संलिप्त रही महिला के फर्जी पासपोर्ट मामले में गाजियाबाद पुलिस द्वारा काटा गया शायद एक भी पर्चा न हो..

अब सवाल गाजियाबाद पुलिस से जरूर बनता है कि राज्य के मुख्यमंत्री पर अभद्र और अश्लील टिप्पणी करना व पासपोर्ट में नकली कागज़ लगाना अगर गंभीर अपराध नही है तो आखिर कौन सा अपराध गंभीर है ..यहां ये ध्यान रखने योग्य जरूर है कि भले ही गाजियाबाद के SSP अभी हाल में ही आये हों पर SP सिटी गाजियाबाद व थानाध्यक्ष साहिबाबाद की जानकारी में ये मामला बहुत पहले से है पर वो सब शायद व्यस्त थे इस महिला के फेसबुक पर आये दिन लाइव होने वाला डांस देखने मे..प्रयागराज पुलिस के खिलाफ कड़ी कार्यवाही कर के मुख्यमंत्री ने अपने इरादे जाहिर किये है पर एक जिला गाजियाबाद भी है जहां खुद उनकी इज्जत उछाली गयी थी और वहां की पुलिस खामोशी से देखती रही थी..

 

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