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देवभूमि हिमाचल प्रदेश में भाजपा सरकार ने कुतर दिए धर्मांतरण के साजिशकर्ताओं के पर.. जयराम सरकार में गूंजा “जय श्री राम”

ये वो मांग थी जिस पर मोदी सरकार भी गम्भीरता से विचार कर रही है .. ये वो जरूरत है जिसके चलते ओड़िसा और तमिलनाडू जैसे जगहों पर धार्मिक असंतुलन फ़ैल गया है .. इस मांग की जरूरत पूर्वोत्तर भारत में काफी पहले से महसूस की जा रही थी और झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेशो में तो इसको अब तक लागू ही हो जाना चाहिए था.. फिलहाल देवभूमि हिमाचल प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार ने आख़िरकार जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा कानून पारित कर ही दिया है .

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विदित हो कि बहुप्रतीक्षित कदम के बाद अब देवभूमि में कोई भी दानवी हरकत नहीं हो पाएगी क्योकि एक बेहद सक्षम नेतृत्व जयराम ठाकुर के साथ हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने शुक्रवार को ‘जबरन धर्मातरण’ पर रोक लगाने के लिए विधानसभा में विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करवा लिया है. अब ये कानून जल्द ही पूरे प्रभावी ढंग से देवभूमि में लागू हो जाएगा .. इस कानून को अभी एक दिन पहले ही सदन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा विधेयक को पेश किया गया था.

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यह विधेयक बहकाने, जबरन, अनुचित तरीके से प्रभावित करने, दबाव, लालच, शादी या किसी भी धोखाधड़ी के तरीके से धर्म परिवर्तन पर कड़ाई से रोक लगाता है. अब अगर कोई भी शादी केवल धर्मातरण के लिए होती है तो वह इस नये विधेयक के तहत अमान्य मानी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह देखा गया है कि कपटपूर्ण साधनों द्वारा धर्मातरण में वृद्धि हुई है। अगर समय रहते इसे रोका नहीं गया तो यह बात विभिन्न जातीय व धार्मिक समूहों के बीच विश्वास और आपसी विश्वास को नष्ट कर सकती है।”उन्होंने कहा कि यदि जबरन धर्मातरण पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो इसके कारण सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा हो जाएगी।

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सबसे अच्छी बात यहाँ ये भी रही कि खुद विपक्ष ने भी आगे बढ़ कर हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2019 का समर्थन किया और बिना वोटिंग के ही यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया ..विपक्ष ने शुरू में विधेयक को पेश करने की आवश्यकता पर कुछ सवाल उठाए क्योंकि इस मामले पहले से ही एक कानून मौजूदा है जिसे कांग्रेस सरकार के शासन काल में वर्ष 2006 में लाया गया था। लेकिन, पार्टी ने बाद में नए विधेयक का समर्थन किया। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एकमात्र सदस्य राकेश सिंघा ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आशंका व्यक्त की।

 

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