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झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास के न्याय ने जीत लिया हिन्दुओ का दिल.. चोर तबरेज के लिए उन्माद फ़ैलाने वालों को कानूनी जवाब

ये वो चोर था जिसकी मौत पर पूरे भारत में कोहराम मचा दिया गया था . कभी ऐसा ही कोहराम मचा था उस समय जब ट्रेन में एक सीट के विवाद को गौ माता से जोड कर न सिर्फ भारत भर में बल्कि विदेशों तक में उसको दुष्प्रचारित किया गया था जबकि हमलावर भी वही था जो हीरो बनाया गया था और उसका नाम जुनैद था . फिर उसके बाद एक नया नाम आया जिसका नाम तबरेज था, तबरेज असल में एक चोर था जिसको चोरी करते हुए पकड़ लिया गया था ..

बाद में जनता ने उसकी पिटाई करते हुए उसको पुलिस को सौंप दिया था और वहां उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई. अचानक ही इस मामले को बना दिया गया हिन्दू और मुसलमान का मुद्दा और मचा दिया गया कोहराम . इसमें ओवैसी जैसे दंगाई स्वभाव के नेता शामिल हो गये तो वहीँ इसी मामले में कई मस्जिदों के इमाम मदरसों के मौलाना भी जुड़ गये .. देखते ही देखते वामपंथी और कांग्रेस के भी कई नेता इसी मुहिम में शामिल हो गये और एक चोर तबरेज मरने के बाद शहीद की तरफ घोषित कर दिया गया..

ये असल में एक दबाव बनाने की प्रक्रिया थी जिसके बहाने जहाँ हिन्दू समाज को निशाने पर लेना था तो वहीं कई ऐसे लोगो को फंसाने की साजिश भी थी जो गौ हत्या आदि का विरोध किया करते थे.. लेकिन यहाँ प्र्श्सना करनी होगी झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास की जो किसी भी प्रकार के दबाव के आगे इंच मात्र भी नहीं झुके और किया वही जो असल में न्याय था… झारखंड के मुख्यमंत्री ने लिया है इस मामले में ऐसा निर्णय कि वो धन्यवाद के पात्र बन गये हैं उस समय में जो न्याय और नीति को सर्वोपरि रखता है .

झारखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है . यहाँ पर झारखंड पुलिस ने चोर तबरेज की मौत केस की चार्जशीट से हत्‍या की धारा को हटा लिया है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत 11 आरोपियों पर दर्ज मामले को खारिज कर दिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कि कहा गया है कि अंसारी की दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) से मृत्यु हुई और यह कहा गया है कि यह पूर्व नियोजित हत्या का मामला नहीं है। गौरतलब है कि पुलिस ने पिछले महीने चार्जशीट में धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया था.

इस मामले को लेकर सरायकेला-खरसावां के एसपी कार्तिक एस ने कहा कि हमने दो कारणों से आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोप पत्र दायर किया। पहली वजह यह है कि वह (तबरेज अंसारी) मौके पर नहीं मरा। ग्रामीणों का अंसारी को मारने का कोई इरादा नहीं था। यहाँ तक कि डॉक्टर ने उसे ‘फिट टू मूव’ घोषित करके जेल भेजने की मंजूरी दे दी। इसी के बाद तबरेज अंसारी को जेल भेज दिया गया था. ये पूरा मामला झारखंड के धातकीडीह गांव का था जहाँ सरकार व पुलिस के इस न्यायोचित फैसले के बाद संतोष जताया जा रहा है .

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