जल रहे थे माँ – बाप, और बेटा बना रहा था वीडियो.. फिर भी सस्पेंड हो गये पुलिस वाले और दर्ज हो गई उन्ही पर FIR… केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की पुलिस के प्रति भावनाओं की कद्र क्या मथुरा में नहीं ?

अभी कुछ समय पहले की ही बात है ये जब केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी ने संसद में पुलिसकर्मियों की व्यथा का बयान देते हुए कहा था कि-  “साहब पुलिस को बदनाम करना बहुत आसान है”.. उसके बाद अगले कार्यक्रम में अमित शाह जी ने देश की आंतरिक सुरक्षा को सम्भालते हुए बलिदान होने वाले लगभग ३४ हजार पुलिस वालों को याद करते हुए जल्द ही पुलिस सिस्टम में आमूलचूल परिवर्तन की बात कही थी.. सुदर्शन न्यूज ने भी इस से पहले पूर्व केन्द्रीय गृहराज्यमंत्री हंसराज अहीर के साथ एक इन्टरव्यू में यही मांग उठाई थी..

अमित शाह जी के बयान के बाद ये माना जा रहा था कि पुलिस के प्रति जनता का और उनके अधिकारियो का दृष्टिकोण जरूर बदलेगा, ख़ास कर उत्तर प्रदेश में तो जरूर ही जहाँ पर आये दिन पुलिस वाले किसी न किसी वजह से आत्महत्या कर रहे हैं जिसमे सबसे ज्यादा बड़ा कारक उच्च दबाव व तनाव है.. आतंकी हमलो से ले कर घर तक के झगड़ो में जिस प्रकार से पुलिस को निशाना बना कर अंधाधुंध शाब्दिक हमले किये जाते हैं , अपने ही रक्षको के खिलाफ ऐसा दुष्प्रचार शायद ही किसी और देश में होता हो ..

यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि अभी कुछ समय पहले ही पुलिस के मनोबल पर लगातार प्रहार करने वाले कुछ तथाकथित न्यूज पोर्टलों पर नॉएडा के SSP वैभव कृष्ण ने कड़ी कार्यवाही की थी जिसके बाद ये माना जा रहा था कि पुलिस के खिलाफ भ्रामक खबरों पर लगाम लगेगी.. लेकिन मथुरा में जो कुछ भी हुआ वो प्राथमिक तौर पर जल्दबाजी में उच्चाधिकारियों का हालात व अर्धसत्य के आगे समर्पण ही माना जाएगा.. मथुरा में 3 पुलिस वाले सस्पेंड कर दिए गये हैं जिसका पूर्ण सत्य सामने आना बाक़ी है ..

विस्तार से इस खबर का आंकलन करने के बाद निम्नलिखित तथ्य सामने आते हैं जिसमे अफवाह या भ्रामक खबर बनाम सत्य जानकारी को सामने रखा जा रहा है .. यहाँ आत्मदाह करने वाले मथुरा के सुरीरकला निवासी 40 वर्ष के जोगेंद्र और उनकी पत्नी 35 वर्ष की चंद्रवती हैं ..  ये घटना बुधवार सुबह की है . बताया जा रहा है कि दोनों साठ फीसदी से भी ज्यादा जल चुके. गंभीर हालत में उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया है. अब आरोपी भी गिरफ्तार कर लिया गया है .. इसके कुछ मुख्य तथ्य निम्नलिखित हैं  –

1– कई जगहों हेडलाइन है कि – दबंगो से परेशान दम्पति ने कोतवाली में किया आत्मदाह –

सत्य – असल में जिसके चलते दम्पति ने आत्मदाह किया है वो कोई दबंग नहीं बल्कि आत्मदाह उनके ही घर घराने और कुनबे के है .. जिस पर दबंग होने का आरोप लगाया जा रहा है वो एक शराबी है जो गांववालों के मुताबिक अक्सर नशे में रहता है ..उक्त शराबी की पत्नी परचून की दुकान चला कर जैसे तैसे परिवार का गुजारा करता है . दबंग का आरोप जिस परिवार पर लग रहा है उसके घर में 2 बड़ी बेटियां हैं जो परचून की दूकान पर बैठ कर जैसे तैसे घर के हालात सम्भालने में अपनी माँ की मदद करती हैं.. आर्थिक और सामाजिक रूप से पीड़ित और अरोपी परिवार लगभग एक हालात से हैं … अब ये दबंग किस परिभाषा में फिट होता है ये बताना मीडीया के उस वर्ग का काम है जिसने मामले को सनसनीखेज बनाने के लिए ऐसी हेडलाइन दी है ..

2कुछ जगह बताया जा रहा है कि आत्मदाह करने वाले दम्पति को पुलिस वालों ने भगा दिया था-  

सत्य – दम्पति को थाने से भगा देने का आरोप भी सरासर झूठ साबित होता दिखाई दे रहा है क्योकि जिन पुलिसकर्मियों पर दम्पति को जिस दिन भगने का आरोप लगाया जा रहा है वो असल में उस दिन इंस्पेक्टर अनूप सरोज और सब इंस्पेक्टर दीपक नागर बाकायदा थाने से पहले ही रवानगी करवा कर राज्यपाल  महोदया की सुरक्षा में वहां से लगभग 50 किलोमीटर दूर वेटनरी कालेज मथुरा शहर में तैनात थे .. उक्त इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर थाने को लभभग 5 बजकर 30 मिनट पर सुबह छोड़ चुके थे जबकि ये घटना लगभग 8 बजे सुबह की है . ऐसे में जो   पुलिस स्टाफ वहां मौजूद ही नही थे वो पीड़ित को कैसे भगा देंगे ?

3- कुछ जगह बताया जा रहा है कि पूर्व में पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की – 

सत्य – ये खबर भी भ्रामक और पुलिस को निशाना बना कर चलाई गई है .. जब इस मामले की बारीकी से पड़ताल की गई तो पाया गया कि एक बार पीड़ित की शिकायत पर आरोपी का एक बार 151 में चालान किया जा चुका था..इस से पहले भी इस आरोपी पर एक अन्य मामले में पुलिस 107 / 116 की कार्यवाही कर चुकी है .. साथ ही पीड़ित के परिवार ने जितनी भी बार पुलिस को सूचना दे कर बुलाया था , उतनी बार पुलिस मौके पर गई और उचित समाधान कर के ही वापस आई .. इसके अलावा दोनों पक्षों से महिलायें आगे हो जाती थीं जिसके अंत में आपसी समझौता हो जाया करता था और उसके चलते ही पुलिस कोई कड़ी कार्यवाही नहीं कर पाई..

4- कुछ जगह बताया गया कि पीड़ित का मकान कब्जा करना चाह रहे थे आरोपी परिवार – 

सत्य –  भूमि , जमीन , जायदाद अदि के विभाग सदैव राजस्व विभाग से सम्बन्धित होते है.. ये सभी विवाद स्थानीय SDM आदि के अधिकार क्षेत्र में आता है . इस से पहले अभी तक एक भी प्रमाण पीड़ित पक्ष की तरफ से ऐसे नहीं आये हैं जिसमे वो साबित कर सकें कि उन्होंने कभी मकान कब्ज़ा करने की शिकायत SDM या DM से की रही हो.. किसी के मकान तक कब्जा होने हालात हों और वो मात्र थाने  गुहार लगाए ये अब तक कहीं अन्यत्र नहीं देखने को मिला है .. SDM या DM एक यहाँ मकान  कब्जा होने  की शिकायत को सार्वजनिक न करना ये साबित करता है कि मकान कब्जा  होने जैसी कोई बात नहीं थी ..

यहाँ पर कुछ अन्य बिन्दुओ पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है –

1- पीड़ित का 17 साल का बेटा खुद ही पहले से तैयारी कर के अपने जलते माता पिता का वीडियो बना रहा था जबकि निश्चित तौर पर उसको अपने माता पिता को ऐसा करने से रोकना ज्यादा जरूरी था ..

2- बताया ये भी जा रहा है कि मिटटी का तेल पीड़ित परिवार अपने घर से छिडक कर आया था.. जिस घर में 17 साल का बेटा व अन्य परिजन हों उस घर में मिटटी का तेल डालने वाले माता पिता को एक बार भी रोकने की कोशिश बाकी अन्य परिजनों द्वारा आखिर क्यों नहीं की गई. जबकि मनावीय स्वाभाव से कोई भी सन्तान या परिजन अपने माता पिता को ऐसा नहीं करने देंगे ..

3- इस मामले में पीड़ित परिवार की मांग थी कि सिर्फ शराबी पिता पर ही कार्यवाही न कर के उसकी दूकान सम्भाल रही बेटियों और उसकी असहाय पत्नी पर भी कानूनी कार्यवाही कर के जेल भेजा जाय .. जबकि उक्त शराबी अभियुक्त की पत्नी और बेटियां खुद ही अपने पिता के तमाम अत्याचारों से पीड़ित थीं .. ऐसे में पुलिस ने न्यायोचित रूप से सिर्फ गलत को गलत कहने की बात कही थी और किसी निर्दोष को बेवजह परेशान करने और न होने देने पर अड़ी थी ..

4- अपुष्ट सूत्रों से बताया जा रहा है कि इसमें कुछ ऐसे भी लोग शामिल हैं जो दोनों पक्षों को परोक्ष रूप से बरगला रहे हैं . इन बरगलाने वालों में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जो कभी पुलिस की कार्यवाही का शिकार अपनी बलवाई व उत्पाती हरकतों के चलते हुए थे .. अब ऐसे लोग इस मामले में पुलिस के विरुद्ध अपनी वैमनस्यता पूरी करते दिखाई दे रहे हैं .

उपरोक्त एक बाद भी इस मामले में आनन फानन में न सिर्फ 1 इंस्पेक्टर व 2 सब इंस्पेक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया है बल्कि उनके ऊपर FIR भी दर्ज करवा दी गई है.. अगर सिर्फ पीड़ित परिवार की हर बात को सही मान कर ही निर्णय लेना है उसकी इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि वो SSP तक से मिल कर आने की बात कह रहा है . फिर क्या स्थानीय सुरीर थाने की ही तरह SSP मथुरा शलभ माथुर ने भी उनकी शिकायत को अनसुना कर दिया था ?

निश्चित तौर पर पीड़ित परिवार के साथ सजा पाए पुलिस वालों की पूरी हमदर्दी है लेकिन अगर किसी से इस मामले में हमदर्दी नहीं दिखाई गई तो वो खुद पुलिस वाले ही हैं.. SSP से मिल कर आने की बात करने वाले पीड़ित की हर बात सही मान कर कार्यवाही का दायरा सिर्फ और सिर्फ इंस्पेक्टर तक ही क्यों सीमित कर दिया गया ? क्या सच में इसको न्याय कहेंगे खुद को आग लगाने वाले दम्पति के साथ या ये न्याय है FIR झेल रहे उन पुलिस वालों के साथ जो उस दिन घटनास्थल पर थे ही नहीं …

निश्चित तौर पर सभी पक्षों को समझ कर इस मामले पर फिर से किसी निष्कर्ष पर पहुचने की जरूरत है . मात्र कुछ लोगों की भावनाओ को संतुष्ट करने एक लिए किसी वर्दी वाले के कैरियर से खिलवाड़ करना कभी भी सुरक्षित समाज की नीव नहीं डाल सकता है. यहाँ व्यथा उन पुलिस वालों की भी महसूस करनी होगी जो आतंक और अपराध से लड़ते हुए ऐसे आरोपों का भी सामना कर रहे हैं.. इस मामले को अपने खुद के एंगल से कुप्र्चारित करने वाले भी यहाँ कामयाब होते दिखा दे रहे है .

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय नोएडा

मोबाइल – 9598805228

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