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बाराबंकी के बाद अब बुलंदशहर में उड़ाई गई एक अफवाह. बताया गया कि सब इंस्पेक्टर ने महिला से की छेड़छाड़. जानिए क्या है असल सच ?


अगर आज के समय में सबसे व्यस्ततम बल के बारे में चर्चा की जाय तो निश्चित तौर पर सबसे ऊपर नाम आएगा उत्तर प्रदेश पुलिस. सीमित संसाधन के साथ कम संख्या बल में जिस प्रकार से यह समाज की रक्षा कर रहे हैं वो अनुकरणीय है और जब गहराई से इसको देखा जाएगा तो पुलिस बल का अंध विरोध करने वाला भी एक बार ये खुद से स्वीकार करेगा कि मनगढ़ंत बातों से बेवजह पुलिस का मनोबल गिराना किसी के भी हित में नहीं है .. कम से कम एक सुरक्षित समाज के तो बिलकुल नहीं .

ध्यान देने योग्य है कि अभी कल ही मीडिया के एक विशेष वर्ग द्वारा अफवाह उड़ाई गई थी कि बाराबंकी में एक नाबालिग बच्ची का बलात्कार कर के उसकी हत्या कर डाली गई है . इस खबर ने इतना तुल पकड़ा कि उस पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रियंका गांधी भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने आ गईं.. समाजवादी पार्टी के तमाम सोशल मीडिया हैंडल इसमें योगी सरकार तक पहुच गये थे लेकिन जब सच सामने आया तो उन सभी को शर्मिंदा होना पड़ा था क्योकि न तो लडकी नाबालिग थी और न ही उसके साथ बलात्कार हुआ था..

यद्दपि यही खबर और भी प्रभावी होती जब वो जिम्मेदार मीडिया एक बालिग लडकी के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग करते.. अब बाराबंकी के फ़ौरन बाद एक और भ्रामक खबर दौड़ गई है बुलंदशहर से ..यहाँ पर पहासू थानाक्षेत्र में एक सब इंस्पेक्टर पर आरोप लगाया गया कि उसने दबिश के दौरान एक घर में घुस कर एक महिला के साथ छेड़छाड़ की.. एक छोटे और अपुष्ट स्तर से उठी इस खबर पर बिना सटीक जानकारी लिए ही कई मीडिया संस्थान अचानक ही टूट पड़े और एकपक्षीय खबर ने शोर मचा दिया .

जब सुदर्शन न्यूज ने इस मामले की तह तक जा कर जानकारी ली तो मामला कुछ और ही निकला.. सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि पुलिस खुद से दबिश देने नहीं गई थी बल्कि उसको बाकायदा एक नम्बर से फोन कर के डायल 100 को बुलाया गया था.. इसलिए यहाँ पर ये कहना गलत होगा कि पुलिस खुद से दबिश देने गई थी बिना किसी सूचना के.. फिर अगले तथ्य पर ये जानना जरूरी होगा कि एक अज्ञात कॉलर ने किसी स्थान पर संदिग्ध हरकत की सूचना दी थी ..

यहाँ पर पुलिस की सक्रियता ही कही जायेगी कि वो बिना बिलम्ब के वहां पहुची और फ़ौरन ही मामले को जानने और समझने की कोशिश करने लगी.. शुरुआत में वहां पर 2 सिपाही पहुचे थे जो डायल 100 यूनिट के थे , बाद में उन्होंने अपने सहयोग के लिए स्थानीय पहासू थाने से एक सब इंस्पेक्टर को और बुला लिया था.. सब इंस्पेक्टर ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए फ़ौरन ही उस तरफ कूच किया और मौके पर पहुच कर हालत को समझने की कोशिश करने लगे .

फोन पर सूचना देने वाला भी संदिग्ध पाया गया और उस स्थान पर एक भाई बहन पाए गये.. शुरुआत में परिचय न होने के चलते पहासू थाने के पुलिस सब इंस्पेक्टर ने कड़ाई से पूछताछ की थी जो बाद में विवाद का विषय बन गई.. यहाँ पर क्या इस आरोप में दम लग रहा है कि एक महिला से उसके भाई के आगे और अपने 2 सिपाहियों के आगे ही एक ऑन ड्यूटी सब इंस्पेक्टर बदतमीजी करने लगेगा ? अगर स्वविवेक से देखा जाय तो उत्तर स्वत ही आएगा कि ऐसा सम्भावित नहीं है .

फ़िलहाल पुलिस के जाते ही महिला का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमे उसने सब इंस्पेक्टर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया.. यद्दपि अपने आरोपों के समर्थन में वो कोई भी प्रमाण नहीं दे पाई जो सब इंस्पेक्टर के लिए कार्यवाही का विषय बने.. फिर भी महिलाओ के सम्मान को प्राथमिकता देने व जांच निष्पक्ष होने की जरूरत हो देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने सब इंस्पेक्टर को लाईन हाजिर कर दिया है और मामले में सब इंस्पेक्टर की चूक या गलती की जांच करवा रहे हैं .

यकीनन नियमानुसार जो उचित होगा वो कार्यवाही उच्चाधिकारी कर रहे हैं लेकिन किसी को बिना पूरे प्रकरण के संज्ञान के अर्ध सत्य के ही आधार पर चारित्रिक बदनाम करना उचित और जिम्मेदारी भरा कार्य नहीं कहा जा सकता है.   सबसे पीडादायक ये पक्ष जरूर है कि आतंक और अपराध से लड़ते पुलिस बल को भ्रामक खबरों का शिकार बनाया जाना किसी भी रूप में एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के लिए उचित नहीं होगा और जिम्मेदारों से कम से कम पुलिस वर्जन के आने की प्रतीक्षा करने की अपेक्षा जरूर रही होगी ..

 

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय नोएडा 

मोबाइल – 9598805228

 


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